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'इस निर्णय की सराहना की जानी चाहिए...', CM योगी के इस कदम पर गदगद हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शामली दौरे के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक फैसले की खुलकर सराहना की.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
'इस निर्णय की सराहना की जानी चाहिए...', CM योगी के इस कदम पर गदगद हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
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आमतौर पर विभिन्न मुद्दों पर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करने वाले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कदम की तारीफ की है. शामली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अयोध्या से जुड़े एक फैसले को सकारात्मक बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी.

अयोध्या से जुड़े फैसले की खुलकर सराहना

शामली में मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के समय एक ऐसा निर्णय लिया, जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े विवाद सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने जिस तरह जांच प्रक्रिया को महत्व दिया, वह स्वागत योग्य कदम है. स्वामी ने कहा कि किसी भी विषय में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच जरूरी होती है. उनके अनुसार, इससे लोगों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सकेगा और धार्मिक संस्थाओं के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा.

गोरक्षा यात्रा के दौरान दिया बड़ा संदेश

गोरक्षा गविष्टि यात्रा के तहत शामली पहुंचे शंकराचार्य का जगह-जगह स्वागत किया गया. धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गोरक्षा और धर्म रक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने समाज से अपील की कि सभी लोग जाति, भाषा और क्षेत्र के भेद से ऊपर उठकर सनातन संस्कृति की मजबूती के लिए काम करें. उन्होंने कहा कि गाय भारतीय परंपरा और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है. इसलिए समाज को गोरक्षा और गोसेवा के प्रति जागरूक होना चाहिए. उन्होंने युवाओं से भी सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया.

एकजुट समाज से मजबूत होगी संस्कृति

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि समाज की ताकत उसकी एकता में होती है. उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं. उन्होंने लोगों से ऐसे कार्यों और नीतियों का समर्थन करने की अपील की जो संस्कृति और परंपराओं को मजबूत बनाएं. उनके अनुसार, देश की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता और सहभागिता दोनों आवश्यक हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि समाज मिलकर काम करेगा तो आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय संस्कृति की पहचान और मजबूत होकर पहुंचेगी.