उत्तर प्रदेश के नगर निगमों ने इस वर्ष आय बढ़ाने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. नगर निकाय निदेशालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि कुल राजस्व संग्रह में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बड़ा उछाल आया है. इससे शहरी विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है और नगर निगमों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हुई है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के नगर निगमों ने कुल 5850.05 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 4439.32 करोड़ रुपये था. यानी कुल आय में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसी आधार पर नगर निगमों को विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे. बढ़ी हुई आय से सड़क, सफाई, जल निकासी और अन्य शहरी सुविधाओं पर अधिक खर्च किए जाने की संभावना है.
राजस्व वृद्धि प्रतिशत के आधार पर गोरखपुर नगर निगम प्रदेश में पहले स्थान पर रहा. यहां आय 103.72 करोड़ रुपये से बढ़कर 216.66 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो 109 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. मथुरा-वृंदावन ने 66 प्रतिशत और वाराणसी ने 64 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की. वहीं कुल राजस्व संग्रह के मामले में लखनऊ नगर निगम सबसे आगे रहा, जिसने 1663.02 करोड़ रुपये जुटाए. मेरठ ने भी 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ उल्लेखनीय प्रदर्शन किया.
जहां कई नगर निगमों ने तेज बढ़त दर्ज की, वहीं शाहजहांपुर और सहारनपुर अपेक्षाकृत पीछे रहे. शाहजहांपुर में केवल तीन प्रतिशत वृद्धि के साथ 30.14 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा, जबकि सहारनपुर में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 70.62 करोड़ रुपये की वसूली हुई. दूसरी ओर, मुरादाबाद नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े 800 से अधिक आवेदन लंबित हैं. पोर्टल की तकनीकी समस्या और रजिस्ट्रार की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.