यमुना को प्रदूषण से राहत देने की बड़ी तैयारी, 270 करोड़ रुपये से बनेंगे दो आधुनिक एसटीपी
यमुना नदी में बिना शोधन के गिर रहे गंदे पानी पर रोक लगाने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत जिले में 113 एमएलडी क्षमता के दो आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे. करीब 270 करोड़ रुपये की इस परियोजना के साथ अगले 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव पर भी 265 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त बनाने की दिशा में जिले में अब तक की सबसे बड़ी पर्यावरणीय परियोजना शुरू होने जा रही है. केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत जिले में कुल 113 एमएलडी क्षमता वाले दो आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे.
शासन से मंजूरी मिलने के बाद यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा.
270 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होंगे दोनों संयंत्र
परियोजना के तहत बनने वाले दोनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण पर लगभग 270 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा संयंत्रों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दीर्घकालिक आधार पर तय की गई है. अगले 15 वर्षों तक इनके संचालन एवं रखरखाव पर करीब 265 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे, जिससे संयंत्रों का नियमित और प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके. जिले के कई नालों का दूषित पानी लंबे समय से बिना किसी शोधन के सेंगर और करबन नदी के माध्यम से यमुना में गिरता रहा है.
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इससे यमुना के जल की गुणवत्ता लगातार प्रभावित होती रही है और प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वर्ष 2022 में नमामि गंगे योजना के अंतर्गत दो एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. हालांकि विभिन्न कारणों से यह योजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी. अब करीब चार वर्ष बाद परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ इसे अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
दो स्थानों पर लगाए जाएंगे आधुनिक एसटीपी
परियोजना के तहत पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कोल तहसील के गोकुलपुर सोनोठ गांव में स्थापित किया जाएगा. इसकी क्षमता 48 एमएलडी होगी. यहां लहटोई-छेरत ड्रेन से आने वाले दूषित पानी का उपचार किया जाएगा. वहीं दूसरा और बड़ा एसटीपी मथुरा रोड पर नगर निगम के मौजूदा प्लांट के समीप बनाया जाएगा. इसकी क्षमता 65 एमएलडी होगी.
इस संयंत्र में अलीगढ़ ड्रेन से आने वाले गंदे पानी का शोधन किया जाएगा. दोनों संयंत्रों में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर दूषित जल को उपचारित किया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत नालों का पानी पहले इन एसटीपी में पूरी तरह शोधित किया जाएगा. इसके बाद ही उपचारित जल को सेंगर और करबन नदी के माध्यम से यमुना में छोड़ा जाएगा. इससे नदी में सीधे गंदे पानी के प्रवाह पर रोक लगेगी और जल की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है.