यूपी सचिवालय में बड़ा प्रमोशन, 8 उप सचिव बने संयुक्त सचिव; जानें कब से लागू होगा आदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने सचिवालय सेवा में आठ उप सचिवों को संयुक्त सचिव और चार समीक्षा अधिकारियों को अनुभाग अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया है. चलिए जानते हैं यह आदेश कब से प्रभावी होगा.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सचिवालय सेवा में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण पदोन्नतियां की गई हैं. राज्य सरकार ने आठ उप सचिवों को संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नत करने के साथ ही चार समीक्षा अधिकारियों को अनुभाग अधिकारी के पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया है. यह पदोन्नति आदेश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा. सभी अधिकारियों को उनके वर्तमान विभागों में ही पदोन्नत किया गया है, जिससे विभागीय कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी.
जारी आदेश के अनुसार उप सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव, आनंद कौशिक, राजेश पांडेय, अजीत कुमार सिन्हा, सत्येंद्र प्रताप सिंह, अवन्तिका प्रसाद राय, नितिन कुमार गुप्ता और लालमणि यादव को संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नति दी गई है. इन अधिकारियों को लंबे प्रशासनिक अनुभव और सेवा के आधार पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.
और किन-किन लोगों की पदोन्नति?
इसके अलावा समीक्षा अधिकारी निशा सिंह, बलराम पांडेय, आशुतोष अग्रवाल और शिवांगी शुक्ला को अनुभाग अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया है. पदोन्नति के बाद ये अधिकारी अपने-अपने विभागों में नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे. शासन का मानना है कि इससे विभागीय कार्यों में और अधिक दक्षता आएगी.
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को उसी विभाग में पदोन्नति दी गई है जहां वे वर्तमान में कार्यरत हैं. इससे कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था पहले की तरह सुचारू रूप से चलती रहेगी.
कब जारी किया जाएगा आदेश?
इस प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सचिवालय सेवा में पदोन्नतियों का क्रम आगे भी जारी रहेगा. जानकारी के अनुसार 336 सहायक समीक्षा अधिकारियों को समीक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने का आदेश भी बुधवार को जारी किया जाएगा. इससे सचिवालय सेवा में बड़ी संख्या में अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिलेगा.
क्या होगा इसका फायदा?
प्रदेश सरकार समय-समय पर सचिवालय सेवा में पदोन्नतियां देकर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास करती रही है. इससे अधिकारियों का मनोबल बढ़ता है और विभागीय कार्यों के बेहतर संचालन में भी मदद मिलती है. नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद अधिकारियों से शासन की योजनाओं और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की जा रही है.