टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण से जन्मी एक बछिया और चार बछड़े, IVRI के वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता
प्राकृतिक प्रक्रिया में गाय या भैंस साल में केवल एक बार गर्भधारण कर पाती है लेकिन ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से दस और एक गाय से बीस उन्नत नस्ल के पशु साल में पैदा किए जा सकते हैं.
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली के वैज्ञानिकों ने पशु प्रजनन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. सात माह के अथक प्रयास के बाद, टीम ने टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण (आईवीएफ) से चार स्वस्थ बछड़ों और एक बछिया को जन्म दिलाया है. यह सफलता ओवम पिकअप (ओपीयू) और इन विट्रो फर्टीलाइजेशन तकनीक के सफल मानकीकरण से संभव हुई है.
वैज्ञानिकों की अथक टीम भागीदारी
इस उपलब्धि का नेतृत्व पशु प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने किया. उनके साथ दैहिकी विभाग के डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. विकास चंद्र और पशुधन प्रबंधन के डॉ. एमके पात्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा. टीम ने ढाई वर्षों में साहीवाल, थारपारकर और मुर्रा भैंस में यह तकनीक सफलतापूर्वक स्थापित की.
स्वदेशी नस्लों को मिला संरक्षण
वैज्ञानिकों ने उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली स्वदेशी गायों का चयन किया. दाता साहीवाल गाय 12 लीटर से अधिक दूध देती थी. वीर्य भी उच्च उत्पादन क्षमता वाले सांड का लिया गया. इस प्रयोग का उद्देश्य स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता को बढ़ाना और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना था.
साल में दस से बीस पशु हो सकेंगे पैदा
प्राकृतिक प्रक्रिया में गाय या भैंस साल में केवल एक बार गर्भधारण कर पाती है लेकिन ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से दस और एक गाय से बीस उन्नत नस्ल के पशु साल में पैदा किए जा सकते हैं. तैयार भ्रूण को कम दूध देने वाली सेरोगेट मदर गाय में प्रत्यारोपित किया जाता है.
किसानों की आर्थिकी होगी मजबूत
इस तकनीक से किसानों को बड़ा लाभ होगा. यदि किसान के पास उन्नत नस्ल का पशु है, तो उसका भ्रूण लैब में तैयार कर दूसरी गाय में ट्रांसफर किया जा सकता है. इससे नस्ल सुधार के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होगी, जिससे पशुपालकों की आय दोगुनी हो सकेगी.