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UP ATS ने आतंकी साजिश का किया पर्दाफाश, पाकिस्तानी गैंगस्टर और ISI समर्थित दो संदिग्ध गिरफ्तार; जानें क्या था उनका प्लान

UP ATS ने नोएडा से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है. आरोपी सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान के गैंगस्टर और ISI के संपर्क में थे.

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Km Jaya

लखनऊ: अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत में आतंकी गतिविधियां करने की साजिश रचने का आरोप है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरठ के रहने वाले तुषार चौहान उर्फ ​​हिज्बुल्लाह अली खान और दिल्ली के समीर खान के तौर पर हुई है. इन्हें 23 अप्रैल 2026 को नोएडा से गिरफ्तार किया गया. इनके कब्जे से एक पिस्तौल, पांच जिंदा कारतूस और एक चाकू बरामद किया गया है.

कैसे बनाया जा रहा था निशाना?

सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बनाया जा रहा था.  ATS के मुताबिक खुफिया इनपुट से पता चला था कि पाकिस्तानी गैंगस्टर, ISI के निर्देशों पर काम करते हुए, आतंकी संगठनों के साथ मिलकर और भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर भारत की आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे. 


विभिन्न आतंकी संगठनों और आपराधिक गिरोहों के साथ मिलकर ये लोग इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय युवाओं को भर्ती करने में सक्रिय रूप से काम कर रहे थे, जिसका मकसद स्लीपर सेल बनाना और उन्हें आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए उकसाना था.

जांच ​​में क्या चला पता?

जांच ​​में पता चला कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी, अपने साथियों जैसे आबिद जट्ट और पाकिस्तान स्थित यूट्यूबर्स जैसे कट्टरपंथी तत्वों के साथ मिलकर भारतीय युवाओं को निशाना बना रहा था. आरोप है कि वे उन्हें पैसे का लालच देते थे और भारत की आंतरिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश रच रहे थे. 

इसके अलावा ये लोग भारतीय युवाओं को अपने आकाओं के निर्देश पर आतंकी हमलों की तैयारी के तौर पर संवेदनशील जगहों की रेकी करने के लिए उकसा रहे थे और उन्हें अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करके कुछ पूर्व-मुसलमानों और अन्य लोगों की हत्या करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे थे.

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों ने बताया कि ISI से जुड़े हैंडलर, जिनकी पहचान मेजर हामिद, मेजर इकबाल और मेजर अनवर के तौर पर हुई है, वह भी टारगेट तय करने और पैसे व हथियार मुहैया कराने में शामिल थे. इनमें से कुछ हथियार बरामद कर लिए गए हैं.