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'मुझे आधी तनख्वाह दीजिए...' IAS रिंकू सिंह राही ने फिर फोड़ा 'लेटर बम', प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही अपने पांच पन्नों के पत्र को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने आधी तनख्वाह लेने की इच्छा जताने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था, तबादले और सुशासन को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं.

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Kuldeep Sharma

उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का एक पत्र इन दिनों प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस पत्र में उन्होंने अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों, कार्य प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कई सुझाव भी दिए हैं, जिन पर अब व्यापक चर्चा हो रही है.

कौन हैं आईएएस रिंकू सिंह राही?

रिंकू सिंह राही का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है. अलीगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मे राही ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की. छात्रवृत्ति के सहारे शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वर्ष 2008 में पीसीएस परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया. नौकरी के साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और 683वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए. वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी हैं.

आधी तनख्वाह और नई पोस्टिंग की मांग

अपने पांच पन्नों के पत्र में रिंकू सिंह राही ने लिखा कि उपजिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर उनके पास पूरे दिन का काम नहीं है और औसतन केवल चार घंटे की जिम्मेदारी रहती है. उन्होंने कहा कि यदि उनकी सेवाओं का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है, तो उन्हें आधी तनख्वाह दी जाए. साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें ऐसी जगह तैनात किया जाए, जहां वे नियमों और संविधान के अनुरूप पूरी क्षमता से काम कर सकें. यदि ऐसा संभव न हो, तो दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति जैसे विकल्प पर विचार किया जाए.


प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

राही ने अपने पत्र में दावा किया कि अवैध कब्जों और अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई के दौरान उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए गए. पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक कोल्ड स्टोरेज की जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही उनका तबादला कर दिया गया. इन टिप्पणियों ने प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

सुशासन के लिए दिए कई सुझाव

रिंकू सिंह राही ने पत्र में केवल शिकायतें दर्ज नहीं कीं, बल्कि प्रशासनिक सुधारों के सुझाव भी दिए. उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण नहीं, बल्कि समस्याओं का स्थायी समाधान होना चाहिए. उन्होंने सोशल ऑडिट, सरकारी भूमि के बेहतर प्रबंधन, ग्राम स्तर पर जवाबदेही, पुस्तकालय, खेल मैदान और 'जीरो पॉवर्टी मॉडल' जैसे विचारों का उल्लेख किया. उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां शिकायतें दोबारा पैदा ही न हों.