लखनऊ: बढ़ते बिजली बिलों के बीच रूफटॉप सोलर सिस्टम आम लोगों के लिए किफायती विकल्प बनकर उभरा है. सरकार भी इस दिशा में सब्सिडी देकर लोगों को प्रोत्साहित कर रही है. सही क्षमता का ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाने पर बिजली की लागत में बड़ी कमी लाई जा सकती है. यदि घर की छत उपयुक्त हो और पर्याप्त धूप मिलती हो, तो परिवार लंबे समय तक कम खर्च में बिजली का लाभ उठा सकता है. जरूरत पड़ने पर बैंक से सोलर लोन भी लिया जा सकता है.
रूफटॉप सोलर लगाने पर सरकार 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है. यह सहायता सिस्टम की क्षमता के अनुसार मिलती है. 3 किलोवाट का ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगाने में लगभग 1.68 लाख से 1.93 लाख रुपये तक खर्च आता है. सब्सिडी मिलने के बाद वास्तविक खर्च काफी कम हो जाता है.
यदि एकमुश्त राशि उपलब्ध नहीं है तो सरकारी और निजी बैंक सोलर लोन भी देते हैं. सरकारी बैंकों में ब्याज दर लगभग 7 प्रतिशत जबकि निजी बैंकों में 9 से 12 प्रतिशत तक हो सकती है. सब्सिडी की राशि लोन खाते में जमा कराने से ईएमआई और कुल वित्तीय बोझ दोनों कम हो जाते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार 1 किलोवाट सिस्टम के लिए लगभग 100 वर्गफीट और 3 किलोवाट के लिए करीब 300 वर्गफीट जगह चाहिए. छत पर पूरे दिन धूप आनी चाहिए. पेड़ या इमारत की छाया बिजली उत्पादन को काफी कम कर सकती है. साथ ही छत की मजबूती और समय-समय पर सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है.
ऑन-ग्रिड सिस्टम बिजली विभाग के ग्रिड से जुड़ा रहता है. अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और उसी आधार पर बिल समायोजित होता है. इस सिस्टम पर सरकारी सब्सिडी मिलती है. वहीं ऑफ-ग्रिड सिस्टम बैटरी पर आधारित होता है. इसकी लागत अधिक होती है और इस पर किसी प्रकार की सरकारी सब्सिडी उपलब्ध नहीं है.
उत्तर प्रदेश रूफटॉप सोलर स्थापना के मामले में देश में सबसे आगे है. राज्य में प्रतिदिन करीब दो हजार नए रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं. फरवरी 2024 से जून 2026 तक 5.57 लाख से अधिक सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं. इस अभियान के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी भी प्रदान की है.