नकली दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब! फर्जी बिलों के सहारे बाजार में उतारने की थी तैयारी, FSDA ने 5 के खिलाफ दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश में एफएसडीए ने फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. पांच आरोपियों पर एफआईआर दर्ज हुई और कई फर्मों पर कार्रवाई की गई.

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Sagar Bhardwaj

उत्तर प्रदेश में नकली और संदिग्ध दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कसने के अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने बड़ी कार्रवाई की है. लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में फर्जी बिलिंग और कागजी लेन-देन के जरिए नकली दवाओं को बाजार में खपाने वाले एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें नए तथ्य सामने आ सकते हैं.

बिना दवा सप्लाई के तैयार किए जा रहे थे फर्जी बिल

एफएसडीए की जांच में सामने आया कि कई दवा कारोबारियों के बीच वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना केवल कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाई जा रही थी. आरोप है कि फर्जी बिल तैयार कर क्रॉस-बिलिंग की जा रही थी और बैंक लेन-देन के बिना ही कारोबार का रिकॉर्ड बनाया जा रहा था. जांच में मिश्रा एसोसिएट्स, मिश्रा मेडिकल एजेंसी, अशोक फार्मास्युटिकल्स, भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है. अधिकारियों के अनुसार, इस तरीके का इस्तेमाल संदिग्ध और नकली दवाओं की सप्लाई चेन को छिपाने के लिए किया जा रहा था.

सत्यापन में नहीं मिला दवा का स्टॉक

जांच के दौरान भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा की प्रोपराइटर महिलाओं ने लिखित बयान में दावा किया कि उनकी फर्मों का संचालन उनकी जानकारी के बिना किया जा रहा था. वहीं, भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों पर दवाओं का कोई स्टॉक नहीं मिला, जबकि दस्तावेजों में बड़ी मात्रा में खरीद और बिक्री दर्ज थी. इसके अलावा एक चर्चित एंटीबायोटिक दवा की खरीद कीमत भी वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम दर्शाई गई. संबंधित सप्लायर ने ऐसी किसी बिक्री से इनकार किया, जिससे जांच एजेंसियों का संदेह और मजबूत हुआ.


जुलाई में पांच बड़े मुकदमे, कई फर्में सील

एफएसडीए ने बताया कि जुलाई महीने में नकली दवा कारोबार के खिलाफ अब तक पांच बड़े मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं. कार्रवाई के दौरान अमीनाबाद की नौ दवा फर्मों का संचालन रोकते हुए उन्हें सील कर दिया गया है. विभाग इन संस्थानों के वित्तीय रिकॉर्ड, लेजर और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके.

दूसरे राज्यों तक पहुंची जांच

एफएसडीए के अनुसार, जांच का दायरा अब उत्तर प्रदेश से बाहर भी बढ़ाया गया है. राजस्थान और उत्तराखंड से जुड़े सप्लायरों तथा देहरादून में संचालित कथित अवैध दवा निर्माण इकाइयों की भी जांच की जा रही है. विभाग ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को संदिग्ध दवा कारोबार पर कड़ी निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वाली फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि नकली दवाओं के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा.