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India Daily

नकली दवाओं के सिंडिकेट पर FSDA का शिकंजा: सहारनपुर के तहखाने से पैकिंग फैक्ट्री सील, लखनऊ तक जुड़े तार

यूपी FSDA ने सहारनपुर से लखनऊ तक फैले नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. सहारनपुर के तहखाने से पैकिंग मशीनरी और दवाएं जब्त की गईं हैं, साथ ही कई आरोपियों पर एफआईआर दर्ज हुई है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
Anuj Kumar
Reported By: Anuj Kumar
नकली दवाओं के सिंडिकेट पर FSDA का शिकंजा: सहारनपुर के तहखाने से पैकिंग फैक्ट्री सील, लखनऊ तक जुड़े तार
Courtesy: Anuj Kumar

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य में सक्रिय एक बड़े नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. लखनऊ में पकड़े गए एजाज नामक आरोपी से पूछताछ के बाद सहारनपुर के नागल इलाके में छापेमारी की गई. इस दौरान एक मकान के तहखाने में चल रही अवैध दवा पैकिंग फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ, जहां से भारी मात्रा में मशीनरी और कच्चा माल बरामद किया गया.

तहखाने से मिली पैकिंग मशीनरी और दवाएं

सहारनपुर के कोटा गांव में हुई इस छापेमारी में एफएसडीए टीम को 32.555 किलोग्राम दवा की स्ट्रिप्स, 6.950 किलो पीली और 4.900 किलो सफेद अनब्रांडेड गोलियां मिलीं. इसके अलावा, डिफकॉर्ट-6 और रोसुवास एफ-10 जैसी चर्चित दवाओं के सैकड़ों प्रिंटेड कार्टन, एल्युमिनियम फॉयल, स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो और डाई-पंच जब्त किए गए. पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराते हुए 15 बोरों में सामग्री सील की गई है.

संगठित सिंडिकेट का खुलासा

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा था. गिरोह के सदस्य बाहर से कच्ची गोलियां, सादा व प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल और कार्टन मंगाते थे. तहखाने में पैकिंग के बाद तैयार दवाएं एजाज, इश्तकार, रहमान, अमित सैन और उबैर जैसे लोग अलग-अलग शहरों में सप्लाई करते थे. पुलिस और एफएसडीए ने मामले में संगठित अपराध के तहत एफआईआर दर्ज की है.

रुड़की और हरिद्वार कनेक्शन की जांच

पूछताछ में पकड़े गए आरोपी विनीत ने उत्तराखंड के रुड़की स्थित प्रिजार्क हेल्थकेयर और रेडिएंट प्रिंटो पैक जैसी कंपनियों में काम करने की बात स्वीकार की है. इसके अलावा वी-ब्रोस लाइफसाइंसेज का नाम भी सामने आया है. जांच एजेंसियां अब रुड़की और हरिद्वार से जुड़ी इन संदिग्ध फर्मों की भूमिका की भी गहनता से पड़ताल कर रही हैं.

लखनऊ में बिलों का फर्जीवाड़ा

उधर लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में की गई जांच में 'लेवेरा-500' दवा के दो बैच राजकीय प्रयोगशाला की जांच में अमानक पाए गए. अभिलेखों के मिलान में 76,790 स्ट्रिप्स की खरीद के मुकाबले 85,832 स्ट्रिप्स की बिक्री दर्ज मिली. खरीद और बिक्री के आंकड़ों में मिले इस भारी अंतर के बाद पुलिस ने संबंधित दवा वितरकों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.