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'आंकड़ों की तुलना समान आधार पर होनी चाहिए', GDP डेटा के आलोचकों पर पीयूष गोयल का पलटवार

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि आंकड़ों की तुलना समान आधार वाली श्रृंखला से होनी चाहिए. सरकार ने भी पुराने और नए आधार वर्ष के अंतर को स्पष्ट किया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'आंकड़ों की तुलना समान आधार पर होनी चाहिए', GDP डेटा के आलोचकों पर पीयूष गोयल का पलटवार
Courtesy: @ani_digital

नई दिल्ली: अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि पर सियासी बहस तेज हो गई है. विपक्ष और कुछ पूर्व अधिकारियों ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि आर्थिक आंकड़ों को सही आधार पर समझने की जरूरत है.

7.8% GDP पर छिड़ी बहस

दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने GDP आंकड़ों पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि आलोचक पुराने और नए डेटा सीरीज की तुलना कर रहे हैं, जबकि दोनों का आधार अलग है. गोयल ने कहा कि नए GDP आंकड़ों में आधार वर्ष 2022-23 है, इसलिए इसकी तुलना 2011-12 वाली पुरानी श्रृंखला से सीधे करना सही नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार या मंत्री GDP के आंकड़े तैयार नहीं करते, बल्कि इन्हें संबंधित सांख्यिकी व्यवस्था के तहत जारी किया जाता है. मंत्री ने आलोचकों पर आंकड़ों को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया.

रोजगार के सवाल पर भी तीखा पलटवार

GDP में तेज वृद्धि के बावजूद रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं होने के सवाल पर भी गोयल ने आलोचकों को आड़े हाथों लिया. पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने वृद्धि दर की वास्तविकता और रोजगार सृजन को लेकर सवाल उठाए थे. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी कहा था कि 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा नए आधार वर्ष के कारण अधिक प्रभावशाली दिखाई दे रहा है. गोयल ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग हर आंकड़े में कमी निकालने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आलोचकों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें देश की आर्थिक प्रगति स्वीकार नहीं हो रही है.

सरकार ने पुराने-नए आधार वर्ष का अंतर समझाया

विवाद के बीच सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भी छह बिंदुओं में GDP आंकड़ों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया. मंत्रालय ने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए कहा कि 86.05 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पुरानी 2011-12 आधार वर्ष वाली GDP श्रृंखला से जुड़ा था.

इसकी तुलना नई 2022-23 श्रृंखला से करना उचित नहीं है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने आंकड़े में बदलाव को इस तरह देखना गलत है कि पिछले साल की GDP जानबूझकर कम की गई, ताकि मौजूदा वर्ष की वृद्धि दर ज्यादा दिखाई दे. सरकार इसी आधार पर आंकड़ों की विश्वसनीयता का बचाव कर रही है.

सरकार ने विकास को बताया बड़ी उपलब्धि

7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को गोयल ने भारत की आर्थिक क्षमता और लोगों की मेहनत का परिणाम बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की और कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. सोमवार को जारी पहली तिमाही के आंकड़े RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक रहे थे.

प्रधानमंत्री ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया था. दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आंकड़ों को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं बताने वाला आंकड़ा बताया. इस तरह GDP का मुद्दा अब केवल आर्थिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का भी नया आधार बन गया है.