नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बाद ऊपरी इलाकों से गंडक नदी में पानी का दबाव अचानक बढ़ गया. बुधवार रात वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर स्थिति लगातार बदलती रही. जलस्तर में तेज उतार-चढ़ाव के चलते महराजगंज जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पूरी रात निगरानी जारी रखी.
रात करीब 8.30 बजे गंडक नदी का बहाव 1 लाख 14 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था. इसके बाद पानी तेजी से बढ़ा. आधे घंटे बाद रात 9 बजे डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 26 हजार 500 क्यूसेक हो गया. इसके बाद भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा.
बैराज के आंकड़ों के अनुसार रात 9.30 बजे गंडक का डिस्चार्ज 1 लाख 36 हजार 700 क्यूसेक दर्ज किया गया. रात 10 बजे यह बढ़कर 1 लाख 42 हजार 100 क्यूसेक पहुंच गया. इसके बाद रात 11 बजे बहाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा और 1 लाख 50 हजार 200 क्यूसेक दर्ज किया गया. बहाव के इस स्तर तक पहुंचने के बाद बैराज और नदी के किनारे बसे इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई. प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बंधों तथा संवेदनशील स्थानों पर निगरानी तेज कर दी.
नेपाल की बाढ़ के बीच कुशीनगर से राहत की खबर सामने आई है. बड़ी गंडक नदी का जलस्तर लगातार नीचे आने से खड्डा रेता क्षेत्र में फिलहाल बाढ़ का खतरा टल गया है. हालांकि तटीय गांवों में प्रशासन ने सतर्कता कम नहीं की है और निगरानी लगातार जारी है. अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए प्रभावित हो सकने वाले इलाकों पर नजर रखी जा रही है. ग्रामीणों को भी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
नेपाल में आई जलप्रलय का असर अभी गोरखपुर-बस्ती मंडल की नदियों में व्यापक रूप से दिखाई नहीं दे रहा है. गोरखपुर में राप्ती और रोहिन नदी का जलस्तर घटा है, जबकि सरयू नदी का पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. फिलहाल गोरखपुर के बाढ़ प्रभावित माने जाने वाले इलाकों में कोई तत्काल खतरा नहीं बताया गया है.
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास सिंह ने कहा कि नेपाल में जलप्रलय के बाद करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी निकल चुका है. गोरखपुर में नदियों का जलस्तर फिलहाल सामान्य है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए विभाग पूरी तरह सतर्क है. पिछले अनुभवों को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में भी लोगों की चिंता बनी हुई है.