menu-icon
India Daily

EPFO की नई मुहिम ने जगाई उम्मीद, पेंशन का लाभ न ले पाने वाले लोगों के लिए खुशखबरी; अब घर-घर पहुंचेंगे डाकिए

कानपुर रीजन में EPFO ने घर-घर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान शुरू किया है. डाक विभाग के सहयोग से पेंशनरों का सत्यापन किया जा रहा है. चलिए जानते हैं क्या-क्या होगें इसके फायदे.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
EPFO की नई मुहिम ने जगाई उम्मीद, पेंशन का लाभ न ले पाने वाले लोगों के लिए खुशखबरी; अब घर-घर पहुंचेंगे डाकिए
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO की पेंशन पाने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. जीवन प्रमाण पत्र जमा न होने के कारण लंबे समय से पेंशन से वंचित पेंशनरों और उनके परिवारों तक अब विभाग खुद पहुंच रहा है. कानपुर रीजन में शुरू हुई घर-घर डीएलसी मुहिम के तहत रुकी हुई पेंशन को फिर से शुरू कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

EPFO और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के बीच हुए समझौते के बाद डाक विभाग के कर्मचारी पेंशनरों के घर जाकर उनकी स्थिति का सत्यापन कर रहे हैं. यदि पेंशनर जीवित हैं तो वहीं उनका डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बन सकता है. इससे उनकी रुकी हुई पेंशन दोबारा शुरू हो सकेगी.

कानपुर रीजन में कितने हैं EPFO पेंशनर?

कानपुर रीजन में कुल 87,292 EPFO पेंशनर हैं. इनमें 21,374 पेंशनरों की पेंशन केवल इसलिए रुकी हुई है क्योंकि उन्होंने जीवन प्रमाण पत्र जमा नहीं किया. इसके अलावा 9,193 ऐसे पेंशनर भी हैं जिन्होंने पांच साल या उससे अधिक समय से पेंशन नहीं ली है. विभाग को यह भी स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन जीवित है और कौन नहीं.

और किसे मिलेगा इसका फायदा?

इस अभियान का एक बड़ा फायदा मृत पेंशनरों के परिवारों को भी मिलेगा. कई मामलों में पेंशनर की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन विभाग को इसकी जानकारी नहीं मिली. जीवन प्रमाण पत्र जमा न होने के कारण उनके आश्रितों को भी पेंशन नहीं मिल पा रही थी. अब सत्यापन के बाद विधवा पेंशन और बच्चों को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन शुरू की जाएगी.

किन लोगों को मिलता है इसका पेंशन?

EPFO की कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (EPS-95) के तहत पात्र कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु के बाद पेंशन दी जाती है. इसके लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा आवश्यक होती है. कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पति या पत्नी तथा पात्र बच्चों को पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है. वर्तमान में न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है.

पेंशन की गणना एक निर्धारित फॉर्मूले से की जाती है. पेंशन योग्य वेतन को पेंशन योग्य सेवा से गुणा कर 70 से भाग देने पर मासिक पेंशन की राशि तय होती है. उदाहरण के लिए यदि किसी की पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये और सेवा अवधि 20 वर्ष है, तो अनुमानित मासिक पेंशन लगभग 4,285 रुपये बनती है.