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'धर्मगुरु को आलोचना-प्रशंसा से ऊपर होना चाहिए', दिल्ली हाईकोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को क्यों दी ये नसीहत?

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से कहा कि धर्मगुरु को आलोचना-प्रशंसा से ऊपर उठना चाहिए. एआई और डीपफेक से छवि खराब होने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंतरिम राहत दी और अगली तारीख 23 सितंबर निर्धारित की.

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Kanhaiya Kumar Jha

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक अहम और हल्की-फुल्की टिप्पणी की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है. कोर्ट ने कहा कि एक धर्मगुरु को आलोचना या प्रशंसा से प्रभावित नहीं होना चाहिए, बल्कि इन सबसे ऊपर उठकर अपने विचारों पर कायम रहना चाहिए.

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपनी 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका आरोप था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम और वीडियो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. विशेष रूप से एआई (AI) और डीपफेक तकनीक के जरिए बनाए गए कंटेंट को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे वह स्वयं बोल रहे हों. इससे उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई.

कोर्ट की टिप्पणी: धर्मगुरु को होना चाहिए निष्पक्ष

सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने अनिरुद्धाचार्य से कहा कि आप एक धार्मिक गुरु हैं, इसलिए आपको आलोचना, प्रशंसा और पहचान जैसी चीजों से प्रभावित नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आप स्वयं अपनी प्रतिष्ठा को लेकर इतने चिंतित दिखेंगे, तो यह उन शिक्षाओं के विपरीत होगा, जो आप अपने अनुयायियों को देते हैं.

आदि शंकराचार्य का हवाला

कोर्ट ने इस दौरान महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपने आलोचकों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे नहीं किए. वे असहमति रखने वालों से तर्क और संवाद के माध्यम से अपनी बात रखते थे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति अपने विचार समाज के सामने रखता है, तो असहमति होना स्वाभाविक है और इसे गलत नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह वास्तविक मानहानि की श्रेणी में न आए.

दिल्ली हाई कोर्ट आने पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अनिरुद्धाचार्य महाराज, जो वृंदावन से जुड़े हैं, उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का ही रुख क्यों किया. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट का दायरा वैश्विक है- यह सामग्री कहीं भी देखी जा सकती है, चाहे वह देश के किसी भी हिस्से में हो. ऐसे में अन्य अदालतें, जैसे इलाहाबाद या लखनऊ की अदालतें भी इस मामले में आदेश दे सकती थीं. कोर्ट ने हल्के अंदाज में पूछा, “दिल्ली से इतना प्रेम क्यों है?”

वकील की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया

अनिरुद्धाचार्य के वकील ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर फैल रहे इस प्रकार के कंटेंट से लोगों का उनके प्रति विश्वास कम हो सकता है. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि लोगों का विश्वास झूठी या भ्रामक चीजों से प्रभावित हो जाता है, तो इसका मतलब है कि उनका विश्वास पहले से ही कमजोर था.

गूगल और यूट्यूब का पक्ष

मामले में Google की ओर से पेश वकील ने बताया कि YouTube पर यदि कोई कंटेंट AI या गलत तरीके से बनाया गया है, तो उसे हटाने का प्रावधान है. साथ ही यह भी कहा गया कि जिन लिंक की शिकायत की गई है, उनमें कुछ फैन पेज के वीडियो भी शामिल हैं, जिनमें अनिरुद्धाचार्य के पुराने बयानों पर लोग आलोचना या सवाल उठा रहे हैं.

कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

हालांकि, कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य महाराज को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि जिन वीडियो और लिंक की शिकायत की गई है, उन्हें यूट्यूब से हटाया जाए. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा. अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है.