चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 'युद्ध नशों विरुद्ध' मुहिम के एक वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर राज्य की जनता को बधाई दी. उन्होंने इसे पंजाब को नशों के खतरे से मुक्त करने की दिशा में एक निर्णायक और ऐतिहासिक अभियान करार दिया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 मार्च 2025 से शुरू हुई यह मुहिम पंजाब में नशा तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई साबित हुई है. पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उन सरकारों ने ड्रग व्यापार को संरक्षण दिया, जिससे राज्य की कई पीढ़ियां बर्बाद हुईं. वहीं, वर्तमान सरकार ने नशों की सप्लाई लाइन तोड़कर और बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेजकर नशा कारोबार की रीढ़ तोड़ दी है.
सीएम मान ने जोर दिया कि इस अभियान को आम लोगों के सक्रिय सहयोग से एक जन आंदोलन में बदल दिया गया है. मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाई गई, जिसके परिणामस्वरूप नशा तस्करों पर सख्त प्रहार हुआ.
मुख्यमंत्री ने मुहिम के प्रभाव को विस्तार से बताया:
कुल 36,178 FIRs नशा तस्करों के खिलाफ दर्ज की गईं.
51,648 तस्करों को गिरफ्तार किया गया.
2,277 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई.
49 लाख से अधिक नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए.
तस्करों से 16.70 करोड़ रुपये की ड्रग मनी जब्त की गई.
तस्करों की करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त या ध्वस्त की गईं.
NDPS एक्ट के तहत सजा दर लगभग 84 प्रतिशत रही, जो 2025 में बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गई.
ये आंकड़े मजबूत जांच, फॉरेंसिक सहयोग और केस तैयारी की सफलता दर्शाते हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत, वर्तमान सरकार नशा पीड़ितों की चिताओं की कीमत पर तस्करों को फलने-फूलने नहीं देगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि यह लड़ाई पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए है. राज्य सरकार इस अभियान को बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखेगी, ताकि पंजाब पूरी तरह नशा मुक्त हो सके.यह मुहिम न केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित है, बल्कि जन भागीदारी, पुनर्वास और जागरूकता पर भी केंद्रित है, जिससे पंजाब में नशों के खिलाफ निर्णायक मोड़ आया है.