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नोएडा-गाजियाबाद में छठ पूजा पर 28 अक्तूबर को स्कूल रहेंगे बंद, योगी सरकार ने किया ऐलान

छठ पर्व अब न सिर्फ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, बल्कि देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भी यह पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. अब छठ को लेकर नोएडा और गाजियाबाद के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है.

Kanhaiya Kumar Jha
नोएडा-गाजियाबाद में छठ पूजा पर 28 अक्तूबर को स्कूल रहेंगे बंद, योगी सरकार ने किया ऐलान
Courtesy: Gemini AI

नोएडा/गाजियाबाद: छठ पर्व के अवसर पर नोएडा और गाजियाबाद के सभी स्कूलों में सोमवार, 28 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया गया है. प्रशासन की ओर से यह आदेश जारी कर दिया गया है. चार दिवसीय छठ महापर्व 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय’ अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ था और 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा.

कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है छठ पर्व

छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है, जो हर साल दिवाली के छह दिन बाद आती है. इस दिन श्रद्धालु छठी मैया और सूर्य देव की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतानों की लंबी आयु की कामना करते हैं.

‘नहाय-खाय’ से होती है पर्व की शुरुआत

चार दिन तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र नदियों या तालाबों में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं. दूसरे दिन उपवास रखा जाता है, जो शाम को सूर्य और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है.

तीसरे दिन ‘सांध्य अर्घ्य’ या ‘पहला अर्घ्य’ के दौरान श्रद्धालु परिवार सहित नदी तट या जलाशयों पर एकत्र होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं. अंतिम दिन यानी चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होता है.

क्यों लोक आस्था का महापर्व है छठ?

छठ को लोक आस्था का महापर्व इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पर्व जनमानस की गहरी आस्था, प्रकृति पूजा, और सामाजिक एकता का प्रतीक है. यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है, जहां यह लोगों के जीवन और संस्कृति का अभिन्न अंग है. 

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी) की उपासना का पर्व है. सूर्य को जीवन, ऊर्जा, और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि छठी मैया को संतान की रक्षा और परिवार की समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है. जल, सूर्य, और प्रकृति के अन्य तत्वों के प्रति यह श्रद्धा इसे लोकप्रिय और प्रकृति-केंद्रित बनाती है.

छठ पूजा में जाति, वर्ग, या आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं होता. यह पर्व हर वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं. नदियों, तालाबों, या जलाशयों के किनारे एकत्रित होकर लोग सामूहिक रूप से पूजा करते हैं, जो सामाजिक एकता को दर्शाता है.