राम मंदिर को 10 हजार, कर्मचारियों को 4 करोड़... चेन्नई की श्रद्धालु ने क्यों किया ऐसा दान?

चेन्नई की श्रद्धालु एसनाग लक्ष्मी ने राम मंदिर के लिए 10 हजार रुपये और कर्मचारियों की सुविधाओं व वेतन बढ़ाने के लिए चार करोड़ रुपये समर्पित किए. उनकी पहल चर्चा में है.

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Meenu Singh

अयोध्या के राम मंदिर में आस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दान की परंपरा को नया अर्थ दिया है. चेन्नई से पहुंचीं श्रद्धालु एसनाग लक्ष्मी ने राम मंदिर के लिए 10 हजार रुपये दिए, लेकिन मंदिर में सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए चार करोड़ रुपये का चेक सौंपा. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों की सुविधाएं सुधारने और उनके वेतन में बढ़ोतरी के लिए किया जाए. उनकी पहल अब चर्चा का विषय बनी हुई है.

कर्मचारियों के लिए चार करोड़

एसनाग लक्ष्मी का यह समर्पण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इतनी बड़ी रकम सीधे मंदिर कर्मचारियों के हित में देने का मामला सामने आया है. उन्होंने अपनी मंशा लिखित रूप में भी बताई. उनका कहना है कि राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों की सुविधाएं बेहतर करने और वेतन बढ़ाने में किया जाना चाहिए. मंदिर के लिए उन्होंने अलग से 10 हजार रुपये समर्पित किए.

वेतन को लेकर उठे सवाल

यह पहल ऐसे वक्त सामने आई है, जब मंदिर में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के वेतन और कार्य अवधि को लेकर असंतोष की चर्चा है. कुछ समय पहले कम वेतन और बढ़े काम के घंटों के चलते एक दर्जन से अधिक गणना कर्मियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था. इसके बाद अलग-अलग एजेंसियों से जुड़े कर्मचारियों के बीच भी वेतनमान को लेकर नाराजगी की बातें सामने आई थीं.


पहली बार सामने आया ऐसा समर्पण

मंदिर कर्मचारियों के लिए किसी श्रद्धालु की ओर से सुविधाओं और वेतन वृद्धि के उद्देश्य से चार करोड़ रुपये देने का यह पहला मामला बताया जा रहा है. इस पहल को रामलला के प्रति श्रद्धा के साथ कर्मचारियों के प्रति सम्मान और संवेदना के तौर पर देखा जा रहा है. साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि मंदिर में बड़ी मात्रा में दान आने के बावजूद कर्मचारियों की मांगों पर पूरी तरह समाधान क्यों नहीं हो पाया.

रामकथा संग्रहालय को मिला खास उपहार

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में ओडिशा के संग्रहकर्ता और संरक्षणकर्ता सत्यकेतन महन्ती ‘कीनू’ ने एक विशाल गदा शंख भेंट किया. संग्रहालय निदेशक डॉ. संजीब कुमार सिंह ने इसे स्वीकार किया. ‘ऑस्ट्रेलियन ट्रम्पेट कोंच’ नाम वाले इस शंख की लंबाई करीब 21 इंच, गोलाई 26 इंच और वजन लगभग चार किलोग्राम बताया गया. महन्ती ने ‘सम्बल रामायण कथा’ के दो खंड भी संग्रहालय को दिए.