रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड का RTI में स्पष्ट जवाब, चंदा वसूली की कोई व्यवस्था मदरसा नियमावली में अंकित नहीं
उत्तर प्रदेश के 558 राज्यानुदानित मदरसों में चंदा वसूली को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आरटीआई में सीधे पूछा गया था कि क्या राज्यानुदानित मदरसे रमजान अथवा अन्य अवसरों पर चंदा, जकात, सदका, फितरा आदि की वसूली के लिए चंदा रसीद बुक छपवा सकते हैं और इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति या व्यवस्था है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 558 राज्यानुदानित मदरसों में चंदा वसूली को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में जनसूचना अधिकारी/रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि राज्यानुदानित मदरसों द्वारा चंदा वसूली की ऐसी कोई व्यवस्था मदरसा नियमावली में अंकित नहीं है.
आरटीआई में सीधे पूछा गया था कि क्या राज्यानुदानित मदरसे रमजान अथवा अन्य अवसरों पर चंदा, जकात, सदका, फितरा आदि की वसूली के लिए चंदा रसीद बुक छपवा सकते हैं और इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति या व्यवस्था है. साथ ही पिछले पांच वर्षों में मदरसा-वार, जनपदवार और वर्षवार वसूले गए चंदे का ब्योरा भी मांगा गया था.
जब नियमावली में प्रावधान ही नहीं तो रसीद बुक किसकी अनुमति से?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है अगर मदरसा नियमावली में राज्यानुदानित मदरसों द्वारा चंदा वसूली की कोई व्यवस्था ही अंकित नहीं है, तो फिर सवाल उठता है कि- चंदा वसूलने का अधिकार किसने दिया, चंदे की रसीद बुक किस नियम के तहत छपवाई गई, रसीद बुक पर सरकारी अनुमति या अनुमोदन किस अधिकारी ने दिया और वर्षों से वसूली गई चंदे की रकम का हिसाब-किताब किसके पास है?
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आरटीआई में चंदा संग्रह के लिए इस्तेमाल होने वाली Donation Receipt Books के संबंध में सरकारी अनुमति, पंजीकरण, अनुमोदन अथवा निर्धारित प्रारूप का प्रावधान भी पूछा गया था.
करोड़ों-अरबों के चंदे का हिसाब कौन देगा?
मामला केवल अनुमति का नहीं है. आरटीआई में पिछले पांच वर्षों की मदरसा-वार, जनपदवार और वर्षवार चंदा धनराशि की जानकारी मांगी गई है. यदि हजारों लोगों से वर्षों तक चंदा, जकात, सदका और फितरा के नाम पर रकम जुटाई गई है तो अब यह सामने आना चाहिए कि कुल कितनी धनराशि एकत्र हुई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया.
FCRA और आयकर अनुपालन भी सवालों के घेरे में:
आरटीआई में यह भी पूछा गया कि क्या राज्यानुदानित मदरसों के संबंध में FCRA तथा आयकर अधिनियम के तहत आवश्यक पंजीकरण/अनुपालन का कोई रिकॉर्ड मदरसा परिषद के पास उपलब्ध है. यदि है तो मदरसा-वार सूची मांगी गई और यदि नहीं है तो स्पष्ट रूप से बताने को कहा गया.
यानी अब जांच का दायरा केवल “चंदा लिया गया या नहीं” तक सीमित नहीं रह सकता. सवाल यह भी है कि चंदा लेने वाली संस्थाओं की कानूनी स्थिति क्या थी और प्राप्त धनराशि का लेखा-जोखा किस व्यवस्था के तहत रखा गया?
चंदे का ऑडिट हुआ या नहीं?
आरटीआई में राज्यानुदानित मदरसों से प्राप्त चंदे/दान का ऑडिट प्रतिवेदन और आय-व्यय विवरण किसी सरकारी विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने की अनिवार्यता पर भी सवाल किया गया है. साथ ही नियमों का पालन न करने वाले मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई के प्रावधान की प्रमाणित प्रति मांगी गई है.
अब 558 मदरसों की चंदा व्यवस्था की जांच की मांग तेज:
रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड के जवाब के बाद सबसे बड़ा सवाल शासन के सामने है- अगर नियमावली में चंदा वसूली की व्यवस्था नहीं है, तो 558 राज्यानुदानित मदरसों में चंदा संग्रह की अनुमति और निगरानी किस व्यवस्था के तहत होती रही?
सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि राज्यानुदानित मदरसों द्वारा जारी की जाने वाली चंदा रसीद पुस्तिकाओं का कोई रिकॉर्ड है या नहीं, पिछले वर्षों में कितनी रकम एकत्र की गई, वह रकम किस बैंक खाते में जमा हुई, उसका ऑडिट हुआ या नहीं और उसका आय-व्यय विवरण किस प्राधिकारी को दिया गया. एक RTI जवाब ने सवालों की पूरी फाइल खोल दी है. अब जरूरत जवाब की नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की है.