IPL 2026

वर्दी में महिला कांस्टेबल का साथी पुलिस वाले के साथ MMS वायरल, बवाल मचने के बाद दोनों पर गिरी गाज

बिजनौर के रेहड़ थाने में तैनात दो पुलिसकर्मियों का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया है. वर्दी की गरिमा और अनुशासन भंग करने के मामले में विभाग ने अब विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में खाकी की साख पर उस समय सवालिया निशान लग गया, जब पुलिस विभाग के ही दो सदस्यों का एक निजी वीडियो डिजिटल मंचों पर सार्वजनिक हो गया. थाना रेहड़ में तैनात एक मुख्य आरक्षी और एक महिला कांस्टेबल के इस वीडियो ने न केवल महकमे में भारी हलचल मचाई, बल्कि स्थानीय जनता के बीच भी गहरी नाराजगी पैदा की है. वीडियो में महिला कर्मी की वर्दी ने मामले को और अधिक संगीन बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जिले के आला अधिकारियों ने त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की है.

जैसे ही यह विवादित वीडियो इंटरनेट के अलग-अलग मंचों पर प्रसारित हुआ, बिजनौर पुलिस प्रशासन की छवि को गहरा धक्का लगा. वीडियो में नजर आ रही महिला कांस्टेबल का वर्दी में होना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा मानी जा रही है. स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस की कार्यशैली और नैतिक मर्यादा पर सवाल उठाए हैं. शासन के लिए यह स्थिति काफी असहज हो गई है क्योंकि इससे वर्दी के प्रति आम जनता के भरोसे और सम्मान पर सीधी आंच आई है.

एसपी की त्वरित कार्रवाई 

बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा ने इस संवेदनशील मामले का तुरंत संज्ञान लिया और बिना किसी देरी के कड़ा फैसला सुनाया. उन्होंने वीडियो के प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर हेड कांस्टेबल और महिला कांस्टेबल दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. एसपी का मानना है कि पुलिस जैसे अत्यधिक अनुशासित बल में इस तरह के अमर्यादित आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है. यह निलंबन उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ा सबक है जो अपनी ड्यूटी के दौरान पेशेवर मर्यादाओं को भूल जाते हैं.

विस्तृत जांच के घेरे में मामला 

प्रशासन ने केवल निलंबन तक ही अपनी कार्रवाई को सीमित नहीं रखा है, बल्कि एसपी ने इस पूरे प्रकरण की गहराई से विवेचना के आदेश दिए हैं. जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो आखिर कब और किस एकांत स्थान पर फिल्माया गया था. सबसे अहम सवाल यह है कि यह अत्यंत निजी सामग्री सोशल मीडिया तक कैसे पहुंची और इसके पीछे किन शरारती तत्वों का हाथ है. तकनीकी टीम अब वीडियो की प्रामाणिकता की भी वैज्ञानिक जांच कर रही है.

विभाग में मची खलबली

इस घटना के उजागर होने के बाद रेहड़ थाने से लेकर पूरे जनपद के पुलिस हलकों में सन्नाटा पसरा हुआ है. विभागीय स्तर पर इसे नियमों का बड़ा उल्लंघन और एक गंभीर नैतिक चूक के रूप में देखा जा रहा है. उच्च अधिकारी अब अन्य अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया व्यवहार और आचरण की भी गोपनीय तरीके से निगरानी कर रहे हैं. एसपी अभिषेक झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि खाकी की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी हरकत को भविष्य में कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा.

यह मामला केवल पुलिसकर्मियों के आचरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल युग में सोशल मीडिया के खतरनाक दुरुपयोग की ओर भी संकेत करता है. पुलिस अब उस संदिग्ध स्रोत की तलाश कर रही है जिसने इस वीडियो को सबसे पहले सार्वजनिक कर अराजकता फैलाई. अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण जांच के बाद प्राप्त तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. फिलहाल, जिले में इस निलंबन और विभाग की भावी रणनीति को लेकर सघन चर्चाएं हो रही हैं.