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रमणरेती आश्रम में पारंपरिक होली: टेसू के रंग और फूलों की बरसात में झूमे श्रद्धालु

राधा-कृष्ण की पावन लीला भूमि ब्रज में होली का अपना अलग ही महत्व है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु मथुरा पहुंचकर यहां की विविध प्रकार की होलियों—लठमार, फूलों की, लड्डू और रंगोत्सव—का आनंद लेते हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
Prem Kaushik
Reported By: Prem Kaushik
रमणरेती आश्रम में पारंपरिक होली: टेसू के रंग और फूलों की बरसात में झूमे श्रद्धालु
Courtesy: PREM KAUSHIK

मथुरा/गोकुल. ब्रज की पावन धरती पर होली का उत्साह चरम पर है. गोकुल स्थित प्रसिद्ध श्री उदासीन कार्ष्णि रमणरेती आश्रम में पारंपरिक होली का भव्य आयोजन किया गया, जहां साधु-संतों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने टेसू के प्राकृतिक रंगों और फूलों की वर्षा के बीच अनूठी होली का आनंद लिया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ब्रज की पारंपरिक झांकियों ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया.

राधा-कृष्ण की पावन लीला भूमि ब्रज में होली का अपना अलग ही महत्व है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु मथुरा पहुंचकर यहां की विविध प्रकार की होलियों—लठमार, फूलों की, लड्डू और रंगोत्सव—का आनंद लेते हैं. इसी क्रम में रमणरेती आश्रम में आयोजित होली ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया.

आश्रम परिसर में राधा-कृष्ण के स्वरूप के समक्ष संतों और भक्तों ने बड़े हर्षोल्लास के साथ टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से होली खेली. रंग-बिरंगे पुष्पों की वर्षा के बीच वातावरण “राधे-राधे” और “श्याम नाम” के जयघोष से गूंज उठा. मंच पर ब्रज की होली की झांकियों का मनमोहक प्रदर्शन किया गया, जिसमें लठमार होली, फूलों की होली और लड्डू होली की झलकियां देखने को मिलीं.

आश्रम के महंत गुरु शरणानंद ने भी श्रद्धालुओं के साथ होली खेलकर आयोजन की शोभा बढ़ाई. उन्होंने कहा कि ब्रज की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. प्राकृतिक टेसू के रंगों से होली खेलने की परंपरा पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ी है.

रमणरेती धाम को लेकर मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल में रेत में क्रीड़ा की थी. इसी कारण यहां की रज को भी पवित्र माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पावन स्थल पर होली खेलने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और राधा-कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है.

कार्यक्रम के दौरान ब्रज की लोक कलाओं का मंचन भी किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया. ढोल, मंजीरे और रसिया गीतों की स्वर लहरियों पर भक्त झूमते नजर आए. विदेशी श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक रंगोत्सव में पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ सहभागी बने.

ब्रज की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है और यहां की हर होली की अपनी अलग पहचान है. गोकुल के रमणरेती आश्रम में आयोजित यह पारंपरिक होली भक्ति, संस्कृति और प्रकृति के रंगों का अद्भुत संगम बनकर सामने आई. रंग-बिरंगे फूलों और टेसू की सुगंधित आभा में सराबोर यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया.