दो बार दिया 'तीन तलाक' फिर देवर और मौलवियों के साथ करवाया हलाल और अब..., मुस्लिम महिला का छलका दर्द
कानून बड़ा या धर्म यह सवाल अभी भी कई के मन में है. क्योंकि कुछ लोग तीन तलाक को नहीं मानते और हलाला के लिए मुस्लिम महिलाओं को मजबूर भी करते हैं. ऐसे में इन महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सैद नगली थाने में 9 दिसंबर को तीन तलाक कानून के बाद होने वाला हलाला का मामला सामने आया है. जिसमें तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यह मामला केवल तीन तलाक का नहीं बल्कि हलाला के आड़ में यौन शोषण और हिंसा से जुडा हुआ है.
मुस्लिम महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हुए तीन तलाक के बाद हलाला की जानकारी दी. महिला ने बताया कि तलाक दिए जाने के बाद उसके पति, देवर और कुछ मौलवियों ने उस पर बार-बार हलाला कराने का दबाव डाला. शिकायत में कहा गया है कि हलाला के नाम पर उसे धमकाकर, डराकर और झूठे आश्वासनों के तहत कई बार यौन संबंध बनाने को मजबूर किया गया. महिला ने इसे गैंगरेप बताया है.
क्या है पूरा मामला?
महिला की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराएं भी लगाई हैं. शुरुआत में तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, लेकिन जांच के दौरान आरोपियों की संख्या बढ़ी है. अब तक पति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है.
पुलिस ने इस मामले की जांच में शादी के समय महिला का उम्र भी काफी कम पाया. जिसके बाद आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं. इसी के साथ मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा एक और कानूनी समस्या सामने आई है. मुस्लिम पर्सनल लॉ में न्यूनतम विवाह आयु का स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
कम उम्र में शादी फिर तलाक और हलाला
महिला ने बताया कि उसकी शादी 2015 में हुई थी. उस समय वह महज 15 साल की थी तब उनके परिवार वालों ने उनकी जबरदस्ती शादी करा दी थी. इसके बाद महिला को से 2016 और 2021 में दो बार तुरंत तीन तलाक दिया गया और हर बार हलाला की मदद से सुलह करने को मजबूर किया गया. महिला ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसे हर बार ऐसा महसूस होता है कि उसे किसी और व्यक्ति को सौंप दिया गया है.
महिला ने कहा कि मुझे ये सब करना पसंद नहीं था. मैं नहीं चाहती थी कि मेरी बेटी कभी यह सब जानें. आपको बता दें कि भारतीय कानून में हलाला का कोई भी जिक्र नहीं है. वहीं 20019 के कानून के मुताबिक तीन तलाक अपराध है. सुप्रीम कोर्ट में अभी भी हलाला, बाल विवाह और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े कई मुद्दे लंबित हैं.