गिरफ्तारी या राहत? पॉक्सो मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 'किस्मत' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट आज करेगा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट आज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कथित बाल यौन शोषण (CSA) मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा. वेदपाठी छात्रों के शोषण के आरोपों और एफआईआर (FIR) के बीच यह कानूनी कार्यवाही मामले का भविष्य तय करेगी.

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Kanhaiya Kumar Jha

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज धार्मिक और कानूनी गलियारों की नजरें टिकी होंगी. शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में आज अग्रिम जमानत याचिका पर अहम सुनवाई होनी है. यह अदालती कार्यवाही इस पूरे विवाद में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि यहीं से तय होगा कि आरोपी पक्ष को कानूनी सुरक्षा मिलेगी या पुलिस उनकी गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ेगी.

यह पूरा मामला तब गरमाया जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ नाबालिग वेदपाठी छात्रों के साथ कथित तौर पर यौन शोषण किया गया है. मामला जब अदालत की चौखट पर पहुंचा, तो कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई.

संगठित व्यवस्था के तहत शोषण का दावा

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया के समक्ष दावा किया है कि यह केवल छिटपुट घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक संगठित व्यवस्था के तहत लंबे समय से ऐसा हो रहा है. उनके अनुसार, लगभग 20 पीड़ित छात्र उनके संपर्क में हैं. यह भी आरोप लगाया गया है कि ये घटनाएं किसी एक स्थान तक सीमित न रहकर विभिन्न धार्मिक स्थलों और आयोजनों के दौरान भी अंजाम दी गईं.

साजिश का दावा: आरोपी पक्ष की दलील

दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक 'गहरी साजिश' बताया है. उनका कहना है कि जिन बच्चों का जिक्र किया जा रहा है, वे उनके छात्र ही नहीं हैं. स्वामी के अनुसार, उन्हें धार्मिक या राजनीतिक विद्वेष के चलते बदनाम करने के लिए यह झूठा जाल बुना गया है. उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने भी इन आरोपों को दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह किसी के सम्मान को नष्ट करने की कोशिश है. आरोपी पक्ष का कहना है कि वे न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास रखते हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

सामाजिक और कानूनी असर

इस मामले ने समाज को दो हिस्सों में बांट दिया है. जहां एक तरफ स्वामी के अनुयायी सड़कों पर उतरकर उनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष निष्पक्ष जांच और बिना किसी दबाव के न्याय की मांग कर रहा है. आज की सुनवाई यह स्पष्ट करेगी कि क्या प्रथम दृष्टया साक्ष्य अग्रिम राहत के लिए पर्याप्त हैं या कानून अपना कड़ा रुख अख्तियार करेगा.