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'ओलंपिक की गेंद हैं केशव मौर्य, स्टूल-किट-किट से परेशान जनता,' अखिलेश ने फिर उड़ाया डिप्टी सीएम का मजाक

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी के नेता केशव मौर्य के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. दोनों नेताओं के बीच हर दिन बयानबाजी हो रही है. केशव मौर्य बार-बार कह रहे हैं कि साल 2029 में फिर बीजेपी की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव, मुस्लिमों पर जब आरोप लगते हैं तो बचाव वाले मोड़ में उतर आते हैं. अखिलेश यादव ने उनकी सीएम योगी के साथ कथित अनबन पर ताना मारा है.

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उत्तर प्रदेश की सियासत में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग, बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. दोनों नेता, दिन-रात एक-दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं. केशव मौर्य ने अखिलेश यादव को जहां अयोध्या रेप केस पर घेरा है, वहीं अखिलेश यादव ने उन्हें केंद्र सरकार का 'स्टूल-किट' बताया है. अखिलेश यादव ने कहा है कि केशव मौर्य केंद्र सरकार के स्टूल किट हैं. उन्होंने डिप्टी सीएम को कृपापात्र मंत्री तक बता दिया है. उन्होंने यह भी कह दिया है कि केशव मौर्य को कोई काम नहीं है, वे सिर्फ बयान मंत्री हैं.

अखिलेश यादव ने रविवार देर रात, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट लिखा, 'भाजपा की स्टूल किट की किट-किट से जनता परेशान हैं. ये कोई काम तो करते नहीं हैं, इसीलिए इन्हें बयान मंत्री बना दें. दिल्ली-लखनऊ के ओलम्पिक में ये बेचारे गेंद की तरह हैं, दिल्ली का रैकेट इधर से लखनऊ भेजता है, तो लखनऊ का रैकेट दिल्ली. ये हारे हुए हैं और कृपा पात्र मंत्री जी हैं, इसीलिए ये चुपचाप सब सहने पर मजबूर है. ये राजनीतिज्ञ नहीं, राजनीति के शिकार हैं.'

किस किट-किट का जिक्र कर रहे हैं अखिलेश यादव?

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संगठन और सरकार को लेकर यूपी बीजेपी में ठन गई है. संगठन के लोग सीएम योगी की कार्यशैली से नाराज हैं. खुद डिप्टी सीएम केशव मौर्य कई मंचों से ये कह चुके हैं कि संगठन, सरकार से बड़ा है. उनकी और सीएम योगी की अनबन, अब जग जाहिर है. दोनों के बीच सियासी तल्खी की बात सामने आ रही है. अखिलेश यादव का दावा है कि वे केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं, तभी वे बार-बार दिल्ली तलब किए जा रहे हैं, जबकि यूपी बीजेपी उन्हें वापस भेज दे रही है. ये चुपचाप सब सह रहे हैं क्योंकि वे कृपापात्र मंत्री हैं. वजह ये है कि वे सिराथू विधानसभा चुनाव, पल्लवी पटेल से हार गए थे. ऐसे में उन्हें विधान परिषद बुलाकर मंत्री पद दिया गया है. कहा जाता है कि वे पिछड़ों के बड़े नेता हैं, इसलिए सरकार ने उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी दी है. 'किट-किट' को लेकर अखिलेश यादव का ताना इसी बात पर है.

अयोध्या रेप केस पर अब तक क्या हुआ है?

अयोध्या रेप केस में मुख्य आरोपी की अवैध संपत्तियों पर प्रशासन का बुलडोजर चल चुका है. रेप का मुख्य आरोपी मोहम्मद मोईद है, उसने 12 साल की बच्ची से कथित तौर पर रेप किया है. उसकी कब्जा की गई संपत्तियों पर बुलडोजर का एक्शन हुआ है. वह कब्जा जैसे अपराध 12 साल से कर रहा है लेकिन सियासी रसूख की वजह से बच जा रहा है. वहा समाजवादी पार्टी का नेता है और फैजाबाद के सांसद अवधेश कुमार का करीबी है. साल 2012 में वह दंगा भड़काने के आरोप में जेल भी गया था. उसके खिलाफ कई दलित परिवारों ने जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है. सरकार अब उसे बक्शने के मूड में नहीं है.