आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप लगा है. छात्रा ने खुद असिस्टेंट प्रोफेसर पर छेड़खानी के आरोप लगाए थे. छात्रा के आरोप लागने के 21 दिन के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने अब तक उस प्रोफेसर को कोई कार्रवाई नहीं की है. छात्रा ने एक फिर से न्याय की गुहार लगाई है. यूनिवर्सिटी के पालीवाल पार्क स्थित समाज विज्ञान संस्थान (आईएसएस) की मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की छात्रा ने 24 मई को असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव वर्मा पर छेड़छाड़ करने, गाली गलौज, मारपीट के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने के आरोप लगाए थे. इस मामले की जांच यूजीसी की गाइड लाइन के तहत गठित विशाखा समिति को सौंपी गई.
छात्रा का आरोप है कि दोपहर एक बजे वह सहायक आचार्य डा. राजीव वर्मा के कार्यालय में लघु शोध जमा करने के लिए पहुंची. उन्होंने कहा कि अभी रूको, कुछ जरूरी काम कर रहा हूं. उनके कार्यालय के बाहर प्रतीक्षा करने लगी, काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी नहीं बुलाया तो उनके कार्यालय में गई, उन्होंने अंदर बुला लिया. कार्यालय में कोई नहीं था, छेड़छाड़ करने लगे.
शोर मचाने पर गाली गलौज और मारपीट की. जिंदगी बर्बाद करने की धमकी देकर वहां से चले गए. साथी छात्रों का आरोप है कि गुरुवार को भी छात्रा लघु शोध जमा करने के लिए आई थी, डॉ. राजीव कुमार ने काफी देर इंतजार कराया. छात्रा से कहा कि बाहर खाना खाने चलते हैं इस पर छात्रा ने इनकार कर दिया.
इस मामले की जांच कर रही विशाखा समिति ने छात्रा का बयान लिया. वहां मौजूद कुछ और छात्र-छात्राओं के बयान दर्ज किए गए. साथ ही कॉलेज के शिक्षक और कर्मचारियों और सबसे अंत में आरोपित असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान दर्ज किए गए. समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दिया है, लेकिन विश्वविद्यालय अभी तक प्रोफेसर पर कोई एक्शन नहीं ले पाई है. इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
जब इसके बारे में विश्वविद्यालय से पूछा गया तो कुलसचिव राजीव कुमार ने बताया कि एक अन्य टीम को विशाखा समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करनी है. टीम के कुलपति प्रो. आशुरानी को रिपोर्ट देते ही आग की कार्रवाई की जाएगी. अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें.