उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए अयोध्या सदर सीट से पवन पांडे को पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया. यह पहली बार है जब सपा ने चुनाव से काफी पहले किसी विधानसभा सीट के लिए अपने प्रत्याशी का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया है. लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित ब्राह्मण सभा में अखिलेश यादव ने कहा कि पवन पांडे इस बार अयोध्या से चुनाव जीतेंगे.
पवन पांडे का वास्तविक नाम तेज नारायण पांडे है और उन्हें समाजवादी पार्टी के युवा और सक्रिय नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय से की, जहां वर्ष 2004 में छात्रसंघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद वह लगातार समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और अखिलेश यादव की कोर टीम 'टीम इलेवन' के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे. पार्टी संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें सपा नेतृत्व का करीबी माना जाता है.
पवन पांडे ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) सीट से जीत दर्ज कर राजनीतिक पहचान बनाई थी. उस चुनाव में उन्होंने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को हराया था. इसके बाद 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में वन राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. हालांकि, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद अखिलेश यादव ने उन पर भरोसा कायम रखा और अब लगातार तीसरी बार उन्हें अयोध्या से मौका देने का फैसला किया है.
हाल के महीनों में पवन पांडे तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया. उनका दावा था कि इस मामले की जानकारी सबसे पहले अखिलेश यादव को मिली थी, जिसके बाद उन्होंने पवन पांडे से जमीनी स्तर पर तथ्य जुटाने को कहा. इस मुद्दे के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया.
अयोध्या उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल है और यहां से उम्मीदवार की समय से पहले घोषणा को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी इस सीट पर जल्द चुनावी अभियान शुरू करना चाहती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस चुनौती का किस रणनीति के साथ जवाब देती है और अयोध्या की चुनावी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है.