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6% वेतन वृद्धि की मांग! 8वें वेतन आयोग की बैठक में कर्मचारियों की बड़ी मांगें

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम ने दूसरे दिन भी विभिन्न विभागों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठकें कीं. इन बैठकों में कर्मचारियों के हितों से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
6% वेतन वृद्धि की मांग! 8वें वेतन आयोग की बैठक में कर्मचारियों की बड़ी मांगें
Courtesy: Pinterest

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं. इसी कड़ी में लखनऊ में आयोजित बैठकों के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं. वेतन वृद्धि, पेंशन सुधार, भत्तों में बढ़ोतरी और सेवा संबंधी सुविधाओं को लेकर कर्मचारियों ने व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया.

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम ने दूसरे दिन भी विभिन्न विभागों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठकें कीं. इन बैठकों में कर्मचारियों के हितों से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई. संगठनों ने वेतन संरचना में सुधार के साथ-साथ पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को भी प्रमुखता से उठाया.

वेतन और फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स के प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष फिटमेंट फैक्टर 3.93 निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा. इसके साथ ही अवर अभियंताओं का न्यूनतम वेतन 1.39 लाख रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी रखी गई. संगठन ने विभिन्न पे लेवल को एकीकृत कर वेतन संरचना को अधिक व्यावहारिक बनाने का सुझाव दिया.

भत्तों और शिक्षा सहायता पर जोर

कर्मचारी संगठनों ने अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की. इसके अलावा मकान किराया भत्ता (एचआरए) को शहरों की श्रेणी के अनुसार 45, 40 और 35 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया. कर्मचारियों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी मांग उठी.

अवकाश और पदोन्नति से जुड़े सुझाव

प्रतिनिधियों ने आकस्मिक अवकाश की संख्या बढ़ाने, अर्जित अवकाश की सीमा 600 दिन तक करने तथा मातृत्व और पितृत्व अवकाश में विस्तार की मांग की. साथ ही सेवा अवधि के विभिन्न चरणों में नियमित पदोन्नति सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा गया.

पेंशन और अनुग्रह राशि में बदलाव की मांग

कर्मचारी संगठनों ने ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि की सीमा बढ़ाने की मांग की. साथ ही वार्षिक वेतन वृद्धि तीन की जगह छह प्रतिशत किए जाने की मांग की।.

इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. संगठनों का मानना है कि इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी.

अन्य संगठनों ने भी रखीं अपनी मांगें

लेखा सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने भी वेतनमान, सेवा शर्तों और भत्तों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना था कि समय के साथ बढ़ती जिम्मेदारियों और महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों को अधिक व्यावहारिक और संतुलित सुविधाएं मिलनी चाहिए.