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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर तुलसी को चढ़ा दें ये 5 चीजें, कहते हैं फिर खाली नहीं रहती धन की तिजोरी!

निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तुलसी माता की विशेष पूजा का महत्व बताया गया है. पूजा में अक्षत, चुनरी, सुहाग सामग्री, कलावा और घी का दीपक अर्पित करना शुभ माना जाता है.

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Edited By: Reepu Kumari
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर तुलसी को चढ़ा दें ये 5 चीजें, कहते हैं फिर खाली नहीं रहती धन की तिजोरी!
Courtesy: Pinterest

निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है. इस वर्ष यह पावन व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा. धार्मिक परंपराओं में इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ तुलसी माता की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि तुलसी माता भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए निर्जला एकादशी पर उनकी पूजा श्रद्धा और नियमों के साथ करने से घर में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि का वातावरण बनता है. पूजा के दौरान कुछ विशेष सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है.

तुलसी पूजा में अक्षत और हल्दी का महत्व

निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता को हल्दी मिश्रित पीले अक्षत अर्पित किए जा सकते हैं. पीला रंग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से जुड़ा माना जाता है. पूजा में इनका प्रयोग शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धा से अर्पित किए गए अक्षत पूजा की पूर्णता का संकेत देते हैं.

नई चुनरी अर्पित करने की परंपरा

इस अवसर पर तुलसी के पौधे को लाल या पीली चुनरी अर्पित करना शुभ माना जाता है. यह सम्मान, श्रद्धा और मंगल भाव का प्रतीक माना जाता है. कई श्रद्धालु विशेष रूप से एकादशी के दिन तुलसी माता को नई चुनरी अर्पित कर पूजा करते हैं.

सुहाग सामग्री का भी है विशेष महत्व

तुलसी माता को चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और कुमकुम जैसी सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूजा परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की कामना के साथ की जाती है. पूजा के समय श्रद्धा और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है.

कलावा बांधते समय करें प्रार्थना

निर्जला एकादशी पर तुलसी के तने पर कलावा बांधना भी शुभ माना जाता है. परंपरा के अनुसार कलावा सात बार लपेटकर परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है. यह धार्मिक आस्था और सकारात्मक संकल्प का प्रतीक माना जाता है.

घी का दीपक और परिक्रमा का विधान

शाम के समय तुलसी माता के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाने की परंपरा है. दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद तीन या सात बार परिक्रमा की जाती है. श्रद्धालु इस दौरान भगवान विष्णु और तुलसी माता का स्मरण करते हुए परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं.

इन नियमों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित नहीं किया जाता. इसी तरह तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी बचने की सलाह दी जाती है. पूजा के दौरान अनावश्यक रूप से पौधे को स्पर्श करने की बजाय श्रद्धापूर्वक सामग्री अर्पित करने का विधान बताया गया है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.