किसानों की समस्याएं सुन रही थीं बागपत डीएम, तभी सभा में आ धमका मटरू लंगूर, वीडियो वायरल

बागपत में किसान दिवस की बैठक के दौरान डीएम अस्मिता लाल ने मटरू नाम के लंगूर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

@khurpenchh
Sagar Bhardwaj

बागपत से सामने आई एक छोटी-सी घटना ने इंसानियत और संवेदनशीलता की बड़ी मिसाल पेश कर दी है. आमतौर पर प्रशासनिक बैठकों में सख्ती और औपचारिकता देखने को मिलती है, लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था. किसान दिवस के मौके पर चल रही एक बैठक में अचानक एक लंगूर ‘मटरू’ पहुंच गया. इसके बाद जो हुआ, उसने न केवल वहां मौजूद लोगों को चौंकाया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी दिल जीत लिया.

लंगूर मटरू की अप्रत्याशित एंट्री

कलेक्ट्रेट सभागार में किसान दिवस के अवसर पर बैठक जारी थी, जहां डीएम अस्मिता लाल और एसपी सूरज कुमार राय किसानों की समस्याएं सुन रहे थे. माहौल गंभीर था और किसान अपनी-अपनी परेशानियां रख रहे थे. तभी अचानक एक लंगूर, जिसे स्थानीय लोग ‘मटरू’ के नाम से जानते हैं, सभागार में दाखिल हो गया. पहले तो लोगों को समझ नहीं आया कि क्या किया जाए, लेकिन मटरू बिना किसी डर के सीधे डीएम की टेबल की ओर बढ़ गया. यह नजारा देखकर सभी हैरान रह गए और कुछ लोग अपने मोबाइल कैमरे ऑन करने लगे.

डीएम का शांत और संवेदनशील रवैया

जैसे ही मटरू डीएम के पास पहुंचा, अस्मिता लाल ने बिना घबराए बेहद शांत और संयमित व्यवहार दिखाया. उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी और हल्के इशारे से मटरू को वहां बैठने के लिए कहा. यह एक ऐसा क्षण था, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति चौंक गया. हैरानी की बात यह रही कि मटरू ने भी मानो इशारा समझ लिया और तुरंत कुर्सी पर बैठ गया. इस दौरान डीएम के चेहरे पर न कोई डर था, न कोई जल्दबाजी, बल्कि एक सहज और दयालु भाव साफ झलक रहा था.

वीडियो वायरल

इस अनोखे पल को वहां मौजूद कई लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया. कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लोग डीएम के इस व्यवहार की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने इसे इंसानियत और करुणा की मिसाल बताया, तो कुछ ने कहा कि ऐसे अधिकारी ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. वीडियो ने यह भी दिखाया कि संवेदनशीलता सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेज़ुबान जानवरों के लिए भी जरूरी है.

प्रशासनिक छवि पर सकारात्मक असर

घटना के बाद अधिकारियों ने मटरू को सभागार से बाहर कर दिया, लेकिन तब तक वह एक खास संदेश छोड़ चुका था. इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की छवि को एक नई दिशा दी है, जहां सख्ती के साथ-साथ संवेदनशीलता भी दिखाई देती है. डीएम अस्मिता लाल का यह व्यवहार बताता है कि जिम्मेदारी निभाने के साथ इंसानियत को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. यही वजह है कि यह छोटी-सी घटना लोगों के दिलों में बड़ी छाप छोड़ गई.