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India Daily

क्या सच में लौट आए राजस्थान के राजा मानसिंह? 10 साल के बच्चे के पुनर्जन्म के दावे ने उठाए बड़े सवाल

राजस्थान के टोंक जिले में एक 10 साल के बच्चे ने खुद को राजा मानसिंह का पुनर्जन्म बताया है. सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है, लेकिन जांच में कई सवाल खड़े हो गए हैं और कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है.

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Edited By: Babli Rautela
क्या सच में लौट आए राजस्थान के राजा मानसिंह? 10 साल के बच्चे के पुनर्जन्म के दावे ने उठाए बड़े सवाल
Courtesy: X

जयपुर: राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह इलाके के जैकमाबाद गांव में इन दिनों एक अनोखी कहानी चर्चा में है. यहां रहने वाला 10 साल का बच्चा कानाराम बैरवा खुद को आमेर के राजा मानसिंह का पुनर्जन्म बता रहा है. इस दावे के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो गई. कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे केवल अफवाह बता रहे हैं.

परिवार के अनुसार, कानाराम ने बहुत छोटी उम्र में ही अलग तरह का व्यवहार दिखाना शुरू कर दिया था. जब वह करीब ढाई साल का था, तब उसने घर का खाना खाने से मना कर दिया और खुद को राजपूत बताते हुए अलग पहचान जताने लगा. उसकी इन बातों ने परिवार को भी चौंका दिया. धीरे धीरे यह बात गांव में फैल गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई.

समय के साथ कमजोर पड़ता गया दावा

जैसे जैसे समय बीता, बच्चे के दावे में बदलाव देखने को मिला. अब वही बच्चा सामान्य तरीके से अपने परिवार के साथ रह रहा है और घर का खाना भी खा रहा है. यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि अगर वह सच में अपने पिछले जन्म को याद करता था, तो उसकी बातें समय के साथ क्यों बदल गईं.

जब बच्चे से उसके कथित पिछले जन्म से जुड़े सवाल पूछे गए, तो वह कुछ सामान्य बातें ही बता पाया. लेकिन जब उससे उसके परिवार, पत्नी या अन्य जरूरी जानकारी के बारे में पूछा गया, तो वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सका. अगर कोई व्यक्ति सच में अपने पिछले जन्म की याद होने का दावा करता है, तो उससे जुड़ी बुनियादी जानकारी होना जरूरी माना जाता है. यहां ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया, जिससे यह दावा मजबूत साबित हो सके.

सोशल मीडिया पर बढ़ा भ्रम

सोशल मीडिया पर इस कहानी को अलग अलग तरीके से पेश किया जा रहा है. कुछ लोग इसे चमत्कार के रूप में दिखा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सनसनी फैलाने का जरिया मान रहे हैं. लेकिन जमीन पर जांच करने पर मामला उतना मजबूत नहीं दिखता जितना सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की कल्पनाशक्ति बहुत तेज होती है. कई बार बच्चे आसपास की बातें सुनकर उन्हें अपनी कहानी का हिस्सा बना लेते हैं. ऐसे मामलों में बिना किसी ठोस सबूत के किसी भी दावे को सच मान लेना सही नहीं होता.