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राजस्थान में नीले बेबी शूज वाले विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई, कई सरोगेसी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने बताया कि सोमवार को यह कार्रवाई की गई. उनके अनुसार नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वुमन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही नौ एआरटी क्लीनिक, एक एआरटी बैंक और एक सरोगेसी क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए गए हैं.

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Edited By: Antima Pal
राजस्थान में नीले बेबी शूज वाले विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई, कई सरोगेसी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द
Courtesy: Pinterest

राजस्थान: राजस्थान सरकार ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वुमन केयर हॉस्पिटल द्वारा संचालित कई असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी क्लीनिकों और सरोगेसी सुविधाओं का रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने इन केंद्रों के विज्ञापन में बच्चों के नीले जूते दिखाने को लिंग चयन को बढ़ावा देने वाला संकेत माना है.

राजस्थान में नीले बेबी शूज वाले विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने बताया कि सोमवार को यह कार्रवाई की गई. उनके अनुसार नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वुमन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही नौ एआरटी क्लीनिक, एक एआरटी बैंक और एक सरोगेसी क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए गए हैं.

कई सरोगेसी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह कदम असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के प्रावधानों के तहत उठाया गया है. उन्होंने बताया कि एक अंग्रेजी अखबार के जयपुर संस्करण में आईवीएफ, फर्टिलिटी और टेस्ट ट्यूब बेबी सेवाओं का विज्ञापन छपा था. इसमें बच्चों के नीले जूते दिखाए गए थे.

विभाग का मानना है कि नीला रंग पारंपरिक रूप से लड़कों से जुड़ा माना जाता है. इसलिए विज्ञापन से प्रथम दृष्टया ऐसा आभास हुआ कि लिंग चयन से जुड़ी सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. कानून के तहत लिंग चयन और लिंग चयन आधारित एआरटी प्रक्रियाओं पर पूरी तरह रोक है.

सस्पेंड किए गए केंद्रों में भीलवाड़ा का एक एआरटी लेवल-1 क्लीनिक, कोटा, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर के एक-एक एआरटी लेवल-2 क्लीनिक, जयपुर के दो एआरटी लेवल-2 क्लीनिक तथा जयपुर स्थित एक सरोगेसी क्लीनिक और एक एआरटी बैंक शामिल हैं.

गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य में एआरटी और सरोगेसी सेवाओं का संचालन केवल निर्धारित कानूनों, नियमों और नैतिक मानकों के अनुसार ही होना चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि लिंग चयन जैसी प्रतिबंधित प्रथाओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा. नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.