राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि राज्य के 611 सरकारी स्कूल अपने भवन के बिना संचालित हो रहे हैं. यह जानकारी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में सामने आई. इनमें 10 स्कूल केवल छात्राओं के लिए हैं. सरकार ने इस स्थिति के लिए पिछली अशोक गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.
समग्र शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2025-26 के UDISE आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 64,484 सरकारी स्कूलों के पास अपने भवन हैं. लेकिन इनमें भी 2,047 स्कूलों में शौचालय और 1,049 में पेयजल की सुविधा नहीं है. करीब 8.5 फीसदी स्कूल अब भी बिजली से वंचित हैं.
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी. टीम पर भीड़ ने कथित तौर पर हमला किया और उसे 'अर्बन नक्सल', 'एंटी-नेशनल' और 'पाकिस्तानी' जैसे शब्द कहे.
टीम उस स्कूल की स्थिति की जांच करने पहुंची थी, जिसके मूल भवन को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद विद्यार्थियों को अस्थायी ढांचे में स्थानांतरित किया गया था.
CJP के 'School Thik Karo' अभियान के तहत किए गए निरीक्षणों में सामने आई समस्या केवल बगरू तक सीमित नहीं है. जयपुर में 38 ऐसे स्कूल हैं, जबकि झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में 23 स्कूल बिना उचित भवन के संचालित हो रहे हैं.
सरकार ने स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपए तथा नए भवनों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. अगले पांच वर्षों में विभिन्न स्रोतों से स्कूल निर्माण, मरम्मत और रखरखाव पर हर साल 2,500 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है.
हालांकि, टीकाराम जूली ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 3,768 स्कूल जर्जर और असुरक्षित हैं, जबकि 83,783 कक्षाएं भी इस्तेमाल के लायक नहीं हैं. उनका आरोप है कि खराब भवनों के कारण कई स्कूल बंद या स्थानांतरित हुए, जिससे विद्यार्थियों का नामांकन प्रभावित हुआ.