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200 साल पहले एक ही रात में उजड़ गए 84 गांव, आज भी वहां क्यों नहीं बसता कोई इंसान? जानें रहस्य

जैसलमेर का कुलधारा गांव 1825 में एक रात में खाली हो गया था. श्राप और अत्याचार की कथाओं के कारण यह गांव आज भी आबाद नहीं हो सका है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
200 साल पहले एक ही रात में उजड़ गए 84 गांव, आज भी वहां क्यों नहीं बसता कोई इंसान? जानें रहस्य
Courtesy: Pinterest

जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित कुलधारा गांव आज भी भारत के सबसे रहस्यमयी स्थानों में गिना जाता है. करीब 200 साल पहले एक ही रात में यह गांव और इसके आसपास के 83 अन्य गांव पूरी तरह खाली हो गए थे. हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी यहां कोई इंसान दोबारा नहीं बस सका है. 

इतिहास के पन्नों में दर्ज यह घटना आज भी लोगों के मन में कई सवाल छोड़ जाती है. कुलधारा गांव जैसलमेर शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित है. इस गांव को साल 1291 में पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाया था. पालीवाल ब्राह्मण अपनी समझदारी और मेहनत के लिए जाने जाते थे. रेगिस्तानी इलाके में भी उन्होंने जल प्रबंधन और खेती के अनोखे तरीके अपनाकर समृद्धि हासिल की थी.

क्यों हुई ऐसी स्थिति?

कभी यह गांव धन संपन्न हवेलियों, मंदिरों और खुशहाल जीवन के लिए प्रसिद्ध था लेकिन साल 1825 की एक रात ने इसकी किस्मत हमेशा के लिए बदल दी. लोककथाओं के अनुसार उस समय जैसलमेर का दीवान सलीम सिंह अत्याचारी और लालची था. कहा जाता है कि उसकी बुरी नजर गांव के मुखिया की बेटी पर पड़ गई थी.

दीवान ने शादी का दबाव बनाया और मना करने पर गांव पर हमले और भारी कर की धमकी दी. गांव वालों के सामने सम्मान और सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो गया. पालीवाल ब्राह्मणों ने झुकने के बजाय गांव छोड़ने का सामूहिक निर्णय लिया.

भूमि को क्या दिया श्राप?

बताया जाता है कि एक ही रात में कुलधारा समेत 84 गांवों के लोग अपना सब कुछ छोड़कर चले गए. जाते समय उन्होंने इस भूमि को श्राप दिया कि यहां कभी कोई दोबारा बस नहीं पाएगा. लोगों का मानना है कि यही श्राप आज भी गांव के उजड़े रहने का कारण है. हालांकि इतिहासकार इसे सामाजिक दबाव और जल संकट से जोड़कर भी देखते हैं.

कैसी है अभी वहां की स्थिति?

आज कुलधारा गांव खंडहरों में तब्दील हो चुका है. पत्थरों से बने घर, संकरी गलियां और टूटे मंदिर उस दौर की कहानी बयां करते हैं. यह स्थान अब राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है.
इसे एक ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया जा चुका है. 

देश विदेश से पर्यटक इस रहस्यमयी गांव को देखने आते हैं. प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रात में यहां रुकने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. कुलधारा आज भी इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम बना हुआ है.