राजस्थान के अलवर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रेफरल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रतापगढ़ क्षेत्र से जयपुर भेजी गई दो गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई. हालात बिगड़ने पर एंबुलेंस को रास्ते में रोकना पड़ा और कर्मचारियों ने वहीं प्रसव कराया. दोनों महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं और मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.
पहला मामला थानागाजी के पड़ाकछापली गांव का है. 33 वर्षीय महिला को प्रसव के लिए सीएचसी लाया गया था, जहां से उसे जयपुर के गणगौरी अस्पताल भेज दिया गया. रास्ते में सड़वा मोड़ के पास प्रसव पीड़ा तेज होने पर एंबुलेंस रोकनी पड़ी. ईएमटी अमित कुमार सैनी ने डिलीवरी कराई, जबकि पायलट मनोज कुमार शर्मा ने सहयोग किया. महिला ने बेटी को जन्म दिया. यह उसकी सातवीं संतान है.
दूसरा मामला गुवाड़ा गुगली की 30 वर्षीय महिला से जुड़ा है. उसे प्रसव के लिए सीएचसी प्रतापगढ़ लाया गया था. बाद में बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया. अस्पताल से करीब 30 किलोमीटर पहले भानपुर मोड़ पर महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी. स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस में ही प्रसव कराना पड़ा. महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. यह उसकी सातवीं डिलीवरी थी.
दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने प्रतापगढ़ सीएचसी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त इलाज देने के बजाय कई मामलों में बड़े अस्पतालों के लिए भेज दिया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को लंबी दूरी तय कराना जोखिम बढ़ा सकता है. खासकर प्रसव के करीब पहुंच चुकी महिलाओं के लिए रास्ते में आपात स्थिति पैदा होने की आशंका बनी रहती है.
CHC प्रतापगढ़ की गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. मोहिनी बलाई के मुताबिक अस्पताल के प्रसूति वार्ड में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में कुछ मामलों में सामान्य प्रसव कराना भी चुनौती बन जाता है. उनका कहना है कि गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ता है. वहीं, ग्रामीण डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. मामले ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है.