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CM मान से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक... बाबा बकाला में जुटे सियासी दिग्गज, रक्खड़ मेले से कैसे साधेंगे पंजाब का वोट बैंक?

अमृतसर के बाबा बकाला साहिब में रक्खड़ पुन्निया मेले ने इस बार सियासी रंग पकड़ लिया. मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिवराज सिंह चौहान समेत कई बड़े नेता पहुंचे.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
CM मान से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक... बाबा बकाला में जुटे सियासी दिग्गज, रक्खड़ मेले से कैसे साधेंगे पंजाब का वोट बैंक?
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Rakhar Punnia Mela: रक्खड़ पुन्निया मेला पंजाब के धार्मिक और राजनीतिक जीवन में खास जगह रखता है. इस बार मेले में आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के बड़े नेताओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. बाबा बकाला साहिब और रईया में लगे राजनीतिक मंचों से नेताओं ने जनता तक अपना संदेश पहुंचाया.

बाबा बकाला साहिब में धार्मिक आस्था के साथ सियासी हलचल

अमृतसर के बाबा बकाला साहिब में हर साल रक्षाबंधन यानी सावन की पूर्णिमा पर रक्खड़ पुन्निया मेले का आयोजन होता है. देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकते हैं. इस जगह का संबंध सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादर जी से भी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु तेग बहादर जी ने यहां भोरे में रहकर 26 वर्ष, 9 महीने और 13 दिन तक तपस्या की थी. इसी वजह से यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ इतिहास में भी खास महत्व रखता है.

बड़े नेताओं की मौजूदगी

रक्खड़ पुन्निया मेला लंबे समय से पंजाब की राजनीति का भी अहम मंच रहा है. मेले के दौरान अलग-अलग दल अपने कार्यक्रम आयोजित करते हैं और बड़ी संख्या में जुटने वाले लोगों के बीच अपनी बात रखते हैं. इस बार आम आदमी पार्टी ने रईया की अनाज मंडी में राज्य स्तरीय सम्मेलन किया, जिसमें सीएम भगवंत मान और उनकी कैबिनेट पहुंची. बीजेपी की ओर से शिवराज सिंह चौहान, नायब सिंह सैनी और केवल सिंह ढिल्लों सहित नेता पहुंचे. कांग्रेस से चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा मौजूद रहे. वहीं अकाली दल के कार्यक्रम में सुखबीर सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा समेत कई नेता शामिल हुए.

अगले विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी मेले की सियासी अहमियत

रक्खड़ पुन्निया मेले का महत्व इस बार बढ़ गया है. अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं. बाबा बकाला साहिब और रईया में आयोजित राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए दल ग्रामीण और किसान वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मेले में हजारों लोगों की मौजूदगी नेताओं को सीधे जनता से जुड़ने का मौका देती है. राजनीतिक दल यहां अपनी ताकत दिखाने के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों और भविष्य की योजनाओं पर संदेश देते हैं.