चंडीगढ़: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने बीते चार वर्षों में बड़े स्तर पर अभियान चलाया है. 16 मार्च 2022 से 31 मई 2026 तक की अवधि में ब्यूरो ने विभिन्न श्रेणियों के 1055 मामले दर्ज किए और 1111 आरोपितों को गिरफ्तार किया. विभाग का कहना है कि इस दौरान न केवल रिश्वतखोरी के मामलों पर कार्रवाई हुई, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की भी गहन जांच की गई.
विजिलेंस ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक कार्रवाई ट्रैप मामलों में हुई. कुल 503 ट्रैप केस दर्ज किए गए, जिनमें 610 लोगों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया.
ब्यूरो ने भ्रष्टाचार से जुड़े 521 आपराधिक मामलों में 485 आरोपितों को गिरफ्तार किया. इन मामलों में सरकारी पदों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और अन्य गंभीर आरोपों की जांच की गई. जांच एजेंसियों ने कई मामलों में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाकर कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.
अवैध संपत्ति के मामलों पर भी विभाग ने विशेष ध्यान दिया. आय से अधिक संपत्ति के 31 मामलों में 16 लोगों की गिरफ्तारी की गई. अधिकारियों के मुताबिक, भ्रष्टाचार के स्रोत तक पहुंचने और अवैध कमाई के नेटवर्क को उजागर करने के लिए वित्तीय जांच को प्राथमिकता दी गई.
इस अवधि के दौरान कुल 296 विजिलेंस जांच दर्ज की गईं. इनमें 116 जांच आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी थीं, जबकि 180 अन्य मामलों में अलग-अलग शिकायतों और आरोपों की जांच शुरू की गई. कई मामलों में अभी भी जांच जारी है और भविष्य में नई कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है.
कानूनी मोर्चे पर भी विजिलेंस ब्यूरो को महत्वपूर्ण सफलता मिली. सक्षम अदालतों ने 149 मामलों में 236 आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई. विभाग का मानना है कि इन फैसलों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश दिया है और जवाबदेही की भावना को मजबूत किया है. आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है.