Punjab Swine Flu: पंजाब में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, लुधियाना में 35 और अमृतसर में 25 केस; जानें लक्षण और बचाव के तरीके
पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. लुधियाना में 35 और अमृतसर में 25 मरीज संक्रमित मिले हैं. जालंधर और मोगा में स्वाइन फ्लू से मौत के मामले भी सामने आए हैं.
पंजाब में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के कई जिलों में मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है. लुधियाना और अमृतसर में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. वहीं जालंधर और मोगा में स्वाइन फ्लू से मौत की जानकारी भी सामने आई है.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लुधियाना में अब तक 35 मरीज संक्रमित मिले हैं. इनमें 18 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 17 मरीज अभी सक्रिय बताए जा रहे हैं. अमृतसर में साल की शुरुआत से अब तक 25 मामले सामने आए हैं. इनमें 20 मरीज रिकवर हो चुके हैं और पांच एक्टिव केस हैं.
जालंधर और मोगा में भी मामले
जालंधर में अब तक 13 संक्रमित मरीज मिले हैं. इनमें 12 मरीज अभी सक्रिय हैं और जिले में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है. मोगा में छह संक्रमित मरीजों की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा फरीदकोट में तीन केस मिले हैं, जिनमें एक एक्टिव और दो मरीज ठीक हो चुके हैं. बठिंडा और फाजिल्का में दो-दो मामले सामने आए हैं और दोनों जिलों में संक्रमित मरीज रिकवर हो चुके हैं.
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अस्पतालों की तैयारियों पर उठे सवाल
बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज की तैयारियों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं. कपूरथला और गुरदासपुर के सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए तकनीकी कर्मचारियों की कमी बताई गई है. अमृतसर में भी उपलब्ध 20 वेंटिलेटरों में से चार खराब बताए गए हैं.
निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी दिख सकते हैं लक्षण
विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार, किसी मरीज की स्वाइन फ्लू जांच निगेटिव आने के बावजूद उसमें फ्लू जैसे लक्षण मौजूद हो सकते हैं. संक्रमण के शुरुआती चरण में वायरस की मात्रा कम होने या सैंपल सही समय और तरीके से नहीं लिए जाने की स्थिति में रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, बुखार, खांसी, गले में खराश और जुकाम केवल स्वाइन फ्लू की वजह से नहीं होते. सामान्य फ्लू, RSV, डेंगू और मलेरिया जैसी अन्य बीमारियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द और ज्यादा थकान भी महसूस हो सकती है. कुछ मामलों में उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं. नाक बहना या नाक बंद होना भी इसके संभावित लक्षणों में शामिल है.
बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
स्वाइन फ्लू और अन्य फ्लू संक्रमणों से बचने के लिए हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है. साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने की सलाह दी जाती है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से ढकना चाहिए. बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचना भी जरूरी है.
अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उससे दूरी बनाए रखना बेहतर है. खुद बीमार महसूस होने पर घर पर आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें.
पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना और पूरी नींद लेना भी जरूरी है. फ्लू का टीका लगवाने को लेकर डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है.