सुखबीर बादल की बढ़ी मुश्किलें, बहबल कलां गोलीकांड में SIT ने फिर किया तलब

बहबल कलां गोलीकांड मामले में सुखबीर सिंह बादल को पंजाब पुलिस की एसआईटी ने फिर तलब किया है. उन्हें 11 सितंबर को चंडीगढ़ में पूछताछ के लिए पेश होना होगा.

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Kanhaiya Kumar Jha

चंडीगढ़: बहबल कलां गोलीकांड मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है. टीम ने 11 सितंबर को चंडीगढ़ में पेश होने का निर्देश दिया है. इससे पहले 20 जुलाई 2026 को भी सुखबीर बादल से करीब दो घंटे तक सवाल-जवाब हुए थे. वह जांच टीम के बुलावे पर पेश होने की बात कह चुके हैं.

एसआईटी ने सुखबीर सिंह बादल को 11 सितंबर को चंडीगढ़ में पेश होने के लिए कहा है. बहबल कलां गोलीकांड की जांच में यह पूछताछ अहम मानी जा रही है. इससे पहले 20 जुलाई को भी पंजाब पुलिस की एसआईटी ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की थी. सुखबीर बादल पहले ही कह चुके हैं कि जांच टीम जब भी उन्हें बुलाएगी, वह पूछताछ के लिए सामने आएंगे.

अकाली दल ने सरकार पर लगाए आरोप

सुखबीर बादल को दोबारा बुलाए जाने पर अकाली दल ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने इसे राजनीतिक साजिश बताया. उनका आरोप है कि सरकार कई मुद्दों पर घिरी हुई है और लोगों का ध्यान असल सवालों से हटाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है. कलेर ने कहा कि ऐसी कोशिशों से सरकार जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से नहीं भटका सकती.


2015 की घटना से जुड़ा है मामला

बहबल कलां गोलीकांड की जड़ें साल 2015 में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के विरोध में निकले प्रदर्शनों से जुड़ी हैं. बरगाडी बेअदबी मामले के बाद पंजाब के कई हिस्सों में लोग प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान बहबल कलां में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया. पुलिस फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए थे.

सुखबीर बादल की भूमिका पर सवाल

घटना के समय पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की सरकार थी. प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे, जबकि सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पंजाब पुलिस गृह विभाग के अधीन थी. इसी वजह से मामले में उनकी भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. 2015 से 2026 तक सरकारें और जांच एजेंसियां बदलती रहीं, लेकिन पीड़ित परिवारों को अंतिम न्याय का इंतजार है.

मामला क्यों बना राजनीतिक मुद्दा

बहबल कलां गोलीकांड पंजाब की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है. बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग को लेकर अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में जांच और पूछताछ के कई दौर चले. अकाली दल का कहना है कि मौजूदा सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है. वहीं, जांच एजेंसी की पूछताछ मामले में तथ्यों को सामने लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है. सुखबीर बादल को अब 11 सितंबर को एसआईटी के सामने पेश होना है.