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पंजाब चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, सतीश पूनिया को मिली प्रदेश प्रभारी की कमान

भाजपा ने राजस्थान से राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके सामने संगठन विस्तार, ग्रामीण-सिख मतदाताओं तक पहुंच और पार्टी को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी.

KanhaiyaaZee
पंजाब चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, सतीश पूनिया को मिली प्रदेश प्रभारी की कमान
Courtesy: X

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के साथ प्रदेश स्तर पर भी जिम्मेदारियों में बदलाव शुरू कर दिया है. इसी क्रम में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के निधन के बाद यह पद खाली था. पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पूनिया की नियुक्ति को अहम माना जा रहा है. संगठन को मजबूत करना उनके सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

पंजाब में भाजपा फिलहाल सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह रही है. ऐसे में पूनिया को उन क्षेत्रों में भी बूथ और मंडल स्तर तक संगठन मजबूत करना होगा, जहां पार्टी की पकड़ कमजोर है. गांवों तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी. चुनाव से पहले मजबूत संगठन भाजपा के प्रदर्शन की बुनियाद बन सकता है.

ग्रामीण और सिख मतदाताओं तक पहुंच

अकाली दल के साथ लंबे गठबंधन के कारण पंजाब में भाजपा का आधार मुख्य रूप से शहरी और हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत रहा है. अब पार्टी ग्रामीण पंजाब और सिख मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है. मई 2026 में केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना इसी दिशा में अहम कदम माना गया. पूनिया को इस सामाजिक और राजनीतिक विस्तार को चुनावी रणनीति में बदलना होगा.

AAP-कांग्रेस के बीच जगह बनाने की चुनौती

पंजाब की राजनीति में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को AAP और कांग्रेस के बीच मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करने की है. 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी. भाजपा अब 2027 में सरकार बनाने का लक्ष्य रख रही है. इसके लिए पार्टी को नशा, कानून-व्यवस्था, किसानों की आय और युवाओं के विदेश पलायन जैसे स्थानीय मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनानी होगी.

गठबंधन और पार्टी के भीतर संतुलन

भाजपा और अकाली दल का पुराना गठबंधन टूट चुका है, हालांकि 2027 से पहले दोनों दलों के फिर साथ आने की चर्चाएं होती रही हैं. फिलहाल भाजपा नेतृत्व अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहा है. इसके अलावा संगठन के भीतर संभावित गुटबाजी और नेताओं की नाराजगी को संभालना भी पूनिया के लिए चुनौती होगी. उन्हें प्रदेश नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और अलग-अलग राजनीतिक समूहों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा.

संगठन से राज्यसभा तक लंबा सफर

सतीश पूनिया का राजनीतिक सफर ABVP से शुरू हुआ और आगे उन्होंने भाजपा संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं. 2018 में वे आमेर से विधायक बने. 2019 में उन्हें राजस्थान भाजपा अध्यक्ष बनाया गया और वे मार्च 2023 तक इस पद पर रहे. बाद में वे राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष रहे. 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें वहां की जिम्मेदारी मिली. 2026 में वे राजस्थान से राज्यसभा सदस्य चुने गए. अब पंजाब की जिम्मेदारी उनके संगठनात्मक अनुभव की नई परीक्षा होगी.