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पराली प्रबंधन में शानदार प्रदर्शन पर पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर मिला बड़ा सम्मान

पंजाब ने पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता दर्ज की है। राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। यह उपलब्धि पराली प्रबंधन के कारण मिली है। गुरमीत सिंह खुदियां ने इसे गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा कि यह मेहनत का नतीजा है। पूरे राज्य में इसको लेकर खुशी है। यह उपलब्धि नई दिशा दिखाती है।

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
पराली प्रबंधन में शानदार प्रदर्शन पर पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर मिला बड़ा सम्मान
Courtesy: AAP

राज्य में पराली जलाने के मामलों में जबरदस्त कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार इसमें करीब 94 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पहले हर साल हजारों मामले सामने आते थे। अब यह संख्या बहुत कम हो गई है। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। इसके पीछे लगातार मेहनत की गई है। यह नतीजा अब साफ दिखाई दे रहा है।

क्या किसानों ने निभाई सबसे बड़ी भूमिका?

इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय किसानों को दिया जा रहा है। उन्होंने पराली जलाने की पुरानी आदत को छोड़ा है। अब मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है। खेती का तरीका बदल रहा है। किसान जागरूक हुए हैं। उन्होंने जिम्मेदारी समझी है। यही बदलाव असली ताकत बना है।

क्या सरकार की नीति रही असरदार?

Bhagwant Mann की अगुवाई में सरकार ने कई योजनाएं लागू कीं। किसानों को आर्थिक मदद दी गई। मशीनों पर सब्सिडी दी गई। इससे किसानों को विकल्प मिला। योजनाएं जमीन पर उतरीं। इसका असर दिखने लगा। सरकार और किसानों की साझेदारी मजबूत बनी।

क्या तकनीक ने आसान किया काम?

फसली अवशेष प्रबंधन के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। बड़ी संख्या में मशीनें खरीदी गई हैं। इसके लिए सरकार ने भारी बजट रखा है। इससे खेतों में काम आसान हुआ है। किसानों का समय और मेहनत बची है। यह तरीका अब लोकप्रिय हो रहा है। आगे भी इसका असर दिखेगा।

क्या पर्यावरण को मिला सीधा फायदा?

पराली जलाने में कमी से प्रदूषण घटा है। हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। मिट्टी की हालत भी बेहतर हुई है। लोगों को राहत महसूस हो रही है। यह बदलाव हर स्तर पर दिख रहा है। पर्यावरण को बड़ा फायदा मिला है। यह कदम जरूरी था।

क्या पंजाब बना बाकी राज्यों के लिए मिसाल?

पंजाब का मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन गया है। यहां सरकार और किसान साथ आए हैं। इसने समस्या का समाधान निकाला है। यह दिखाता है कि सही नीति से बदलाव संभव है। पर्यावरण के लिए यह बड़ा कदम है। पंजाब ने नई सोच पेश की है।