करीब 11 साल 4 महीने और 24 दिन जेल में बिताने के बाद संत रामपाल आखिरकार रिहा हो गए हैं. हिसार की सेंट्रल जेल-2 से उनकी रिहाई शुक्रवार को पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई. यह रिहाई उन्हें देशद्रोह के मामले में जमानत मिलने के बाद मिली है. रामपाल का नाम 2014 के सतलोक आश्रम विवाद से जुड़ा रहा है, जिसने उस समय पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.
रामपाल को हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से देशद्रोह के मामले में जमानत मिली थी. अदालत के आदेश के बाद उनके वकीलों ने हत्या के दो मामलों में 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा कराए. इसके बाद सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं. जेल प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें रिहा कर दिया. हालांकि यह साफ किया गया है कि अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी और भविष्य में सुनवाई भी हो सकती है.
रामपाल की रिहाई के समय उनके परिवार के सदस्य पहले से ही जेल के बाहर मौजूद थे. बताया गया कि वे सात गाड़ियों के काफिले में उन्हें लेने पहुंचे थे. जेल से बाहर निकलने के बाद रामपाल सफेद रंग की एसयूवी में बैठकर वहां से रवाना हुए. गाड़ी के शीशों पर पर्दे लगे हुए थे, जिससे अंदर का दृश्य साफ नहीं दिख रहा था. मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, बाहर आते समय उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी और माहौल शांतिपूर्ण बना रहा.
यह पूरा मामला नवंबर 2014 से जुड़ा है, जब अदालत ने रामपाल को पेश होने का आदेश दिया था लेकिन अदालत में पेश न होने के बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुंची. वहां पुलिस और समर्थकों के बीच टकराव हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गया. इस दौरान महिलाओं और बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए थे.
इस घटना के बाद 2018 में हिसार की अदालत ने रामपाल को दोषी ठहराते हुए हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साथ ही उन पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था. अब देशद्रोह के मामले में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी है. हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य मामलों की सुनवाई अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में अदालत के फैसलों पर सभी की नजर बनी रहेगी.