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‘लायन ऑफ लद्दाख’ सोनम वांगचुक का 61 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन

लद्दाख में अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. भारतीय सेना के इस बहादुर अधिकारी ने 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया था, जिसके लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
‘लायन ऑफ लद्दाख’ सोनम वांगचुक का 61 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन
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कारगिल युद्ध के वीर और ‘लायन ऑफ लद्दाख’ के नाम से प्रसिद्ध सोनम वांगचुक का 61 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है. लद्दाख में अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. भारतीय सेना के इस बहादुर अधिकारी ने 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया था, जिसके लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

कारगिल युद्ध में वीरता की मिसाल

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान कर्नल सोनम वांगचुक ने ऑपरेशन विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस समय वे मेजर के पद पर थे और लद्दाख स्काउट्स की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे. दुर्गम पहाड़ी इलाके और बर्फीली ऊंचाइयों के बीच उन्होंने अपनी टीम को संभाले रखा. दुश्मन की घात लगाकर की गई गोलीबारी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पलटवार करते हुए दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया. इस कार्रवाई में उन्होंने न केवल दुश्मनों को मार गिराया, बल्कि हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया.

महावीर चक्र से सम्मानित

उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. उनकी वीरता की कहानी सेना में आज भी प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है. भारतीय सेना के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने अपने करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा दी और हर बार अपने कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण दिखाया. उनका पूरा सैन्य जीवन अनुशासन, साहस और देशभक्ति का प्रतीक रहा.

देशभर में शोक की लहर

कर्नल वांगचुक के निधन पर देशभर में शोक व्यक्त किया जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया और उन्हें एक साहसी और समर्पित सैनिक बताया. उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने जीवन से यह साबित किया कि सच्चा सैनिक हर परिस्थिति में देश की सेवा को सर्वोपरि रखता है. लद्दाख में भी लोग उन्हें गर्व और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं.

एक प्रेरणादायक विरासत

कर्नल सोनम वांगचुक केवल एक सैनिक ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और साहस की जीवंत मिसाल थे. उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने साथियों का मनोबल बनाए रखा और हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व किया. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा. उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. देश ने एक सच्चा नायक खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी.