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पंजाब के स्कूलों में शुरू हुआ वैज्ञानिक एंटी ड्रग अभियान, लाखों छात्रों को नशे से बचाने की नई पहल

पंजाब सरकार ने स्कूलों में वैज्ञानिक एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम लागू कर नशे के खिलाफ नई पहल शुरू की है. हजारों शिक्षक और लाखों छात्र इस अभियान से जुड़े हैं. कार्यक्रम का उद्देश्य जागरूकता के साथ व्यवहारिक कौशल विकसित करना भी है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
पंजाब के स्कूलों में शुरू हुआ वैज्ञानिक एंटी ड्रग अभियान, लाखों छात्रों को नशे से बचाने की नई पहल
Courtesy: AI

पंजाब में नशे की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सबसे मजबूत माध्यम बनाया है. अब केवल पुलिस कार्यवाही या नशा मुक्ति केंद्रों पर निर्भर रहने के बजाय स्कूलों में वैज्ञानिक तरीके से छात्रों को जागरूक किया जा रहा है. राज्य में एविडेंस-बेस्ड एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसके जरिए विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने और नशे से दूर रहने के व्यवहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं. इस पहल को शिक्षकों का भी व्यापक सहयोग मिल रहा है.

स्कूलों तक पहुंचा नया अभियान

राज्य सरकार ने पिछले साल अगस्त में एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शुरू किया था. अब तक 3,658 सरकारी स्कूलों के करीब 8 लाख छात्रों को इससे जोड़ा जा चुका है. लगभग 6,500 प्रशिक्षित शिक्षक नियमित रूप से इस पाठ्यक्रम का संचालन कर रहे हैं. इसे वैज्ञानिक शोध और व्यवहार विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया गया है.

शिक्षकों की भूमिका बनी सबसे अहम

इस कार्यक्रम में शिक्षकों को केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रखा गया है. उन्हें किशोरों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानने, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने और समय रहते उचित मार्गदर्शन देने का प्रशिक्षण दिया गया है. TISS के सहयोग से सीमावर्ती सहित नौ जिलों के 1,400 से ज्यादा स्कूल प्रमुखों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.

व्यवहारिक कौशल पर दिया जा रहा जोर

पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभाव बताना नहीं है. छात्रों को साथियों के दबाव का सामना करने, सही निर्णय लेने और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में नशे से दूरी बनाए रखने के व्यवहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं. इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है.

वर्कशॉप के मिले सकारात्मक परिणाम

अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं. प्रशिक्षण के बाद 75 प्रतिशत शिक्षकों ने बेहतर स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलने की बात कही. वहीं 85 प्रतिशत शिक्षकों ने माना कि किशोरों में नशे की समस्या का संबंध तनाव और सामाजिक दबाव से जुड़ा होता है.

माइंडफुलनेस से बढ़ा आत्मविश्वास

सरकार ने स्कूलों में माइंडफुलनेस कार्यक्रम भी शुरू किया है. कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए प्रतिदिन 30 मिनट के विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं. मोहाली के 210 सरकारी स्कूलों में पायलट परियोजना के दौरान 83 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि इससे उनका तनाव कम हुआ और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ा. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशामुक्त युवा ही पंजाब के सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव हैं.