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69 साल पुराने पेंशन विवाद में कर्मचारी को राहत, हाई कोर्ट ने की पंजाब सरकार की अपील खारिज

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि जिला बोर्ड की सेवा को केवल प्रोविडेंट फंड अंशदान न होने के आधार पर पेंशन से बाहर नहीं किया जा सकता. अदालत ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
69 साल पुराने पेंशन विवाद में कर्मचारी को राहत, हाई कोर्ट ने की पंजाब सरकार की अपील खारिज
Courtesy: AI

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के पेंशन अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला बोर्ड के अधीन की गई सेवा को केवल इस वजह से पेंशन की गणना से बाहर नहीं किया जा सकता कि उस दौरान कर्मचारी ने कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में अंशदान नहीं किया था. कोर्ट ने पंजाब सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसलों को सही माना.

69 साल पुराने विवाद पर आया फैसला

यह मामला लुधियाना निवासी हरदयाल सिंह की सेवा अवधि से जुड़ा था. उन्होंने साल 1953 से 1957 तक जिला बोर्ड के स्कूलों में काम किया था. बाद में इन स्कूलों का पंजाब सरकार में विलय होने पर वह सरकारी कर्मचारी बन गए. रिटायरमेंट के समय उनकी शुरुआती सेवा अवधि को पेंशन में नहीं जोड़ा गया था.

रिटायरमेंट बेनिफिट्स में हुआ था नुकसान

हरदयाल सिंह साल 1986 में हेडमास्टर पद से सेवानिवृत्त हुए थे. सेवा अवधि कम माने जाने के कारण उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट्स  पूरे नहीं मिले. इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया. ट्रायल कोर्ट और पहली अपीलीय अदालत ने पहले ही उनके पक्ष में फैसला दिया था.

सरकार की दलील अदालत ने नहीं मानी

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में कहा कि संबंधित अवधि पेंशन योग्य नहीं थी, क्योंकि कर्मचारी ने उस समय कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में अंशदान नहीं किया था. सरकार ने सेवा नियमों का हवाला देकर पूर्व सेवा को पेंशन में शामिल न करने की मांग की. अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.

एडहाक सेवा पर भी अदालत की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि नियमों में कहीं भी यह नहीं लिखा कि प्रोविडेंट फंड की सदस्यता न होने पर सेवा अवधि अमान्य हो जाएगी. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन तय करते समय एडहाक सेवा को भी गणना में शामिल किया जा सकता है. इसलिए कर्मचारी को उसका वैध लाभ मिलना चाहिए.

दूसरे कर्मचारियों के लिए भी अहम फैसला

यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी शुरुआती सेवा अलग संस्थानों में रही और बाद में सरकारी सेवा में विलय हुआ. अदालत के इस फैसले से ऐसे मामलों में पेंशन अधिकारों को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और भविष्य में समान विवादों के समाधान में भी मदद मिलेगी.