पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की कवायद तेज कर दी है. पार्टी नेतृत्व राज्य में सत्ता में वापसी के लिए सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने विभिन्न वर्गों के मतदाताओं को साधने के उद्देश्य से नया नेतृत्व मॉडल तैयार किया है, जिसे हाईकमान की सहमति भी मिल चुकी है. इसी रणनीति के तहत पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
विजयइंदर सिंगला को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा को चुनावी समितियों की कमान सौंपी जा सकती है. कांग्रेस का मानना है कि चरणजीत सिंह चन्नी इस वर्ग के सबसे प्रभावशाली और स्वीकार्य नेताओं में शामिल हैं. चन्नी की पहचान एक जमीनी नेता के रूप में रही है. मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सादगी और आम लोगों से जुड़ी छवि ने उन्हें अलग पहचान दिलाई थी. इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में जालंधर से उनकी बड़ी जीत ने भी पार्टी नेतृत्व का भरोसा मजबूत किया है. कांग्रेस को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में दलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का पारंपरिक वोट बैंक दोबारा पार्टी की ओर लौट सकता है.
पंजाब की राजनीति में दलित समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है. राज्य में लगभग 32 प्रतिशत दलित आबादी है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाती है. कांग्रेस केवल दलित वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती. पार्टी की रणनीति शहरी और हिंदू मतदाताओं को भी साथ जोड़ने की है. पंजाब में लगभग 25 से 26 प्रतिशत शहरी और सामान्य हिंदू मतदाता हैं, जिनका प्रभाव लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसी सीटों पर काफी अहम माना जाता है. कांग्रेस अपनी नई रणनीति में जट्ट सिख नेतृत्व को भी बराबर महत्व देने की तैयारी में है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को चुनावी समितियों की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका मजबूत रखने की योजना है.