उत्तराखंड में इस बार गर्मी का असर बिजली व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. लगातार बढ़ते तापमान और पर्यटन गतिविधियों के चलते राज्य में बिजली की मांग हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही है. जून 2026 के अंतिम सप्ताह में बिजली की खपत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जिससे ऊर्जा विभाग के सामने निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है. ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार 26 जून को उत्तराखंड में 63.18 मिलियन यूनिट बिजली की मांग दर्ज की गई, जो जून महीने का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. इससे पहले 25 जून को 61.42 मिलियन यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई थी. लगातार बढ़ती मांग यह संकेत दे रही है कि राज्य में बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार बिजली की मांग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण भीषण गर्मी है. तापमान बढ़ने के साथ घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. इससे बिजली की खपत में तेजी आई है.
उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन अपने चरम पर है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक राज्य पहुंच रहे हैं. होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं और पर्यटन से जुड़े प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत बढ़ने से शहरी और पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली की मांग पहले के मुकाबले काफी अधिक हो गई है.
राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी भी बिजली की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है. फैक्ट्रियों, व्यावसायिक संस्थानों और नए आवासीय इलाकों में लगातार बिजली की जरूरत बढ़ रही है, जिससे बिजली वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
गर्मी के मौसम में खेतों की सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में बिजली से चलने वाले पंपों का उपयोग किया जा रहा है. कृषि क्षेत्र में बढ़ी बिजली खपत ने भी कुल मांग को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.
कुछ क्षेत्रों में गैस की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों ने खाना बनाने और अन्य जरूरतों के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों का अधिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है. होटल, ढाबों और घरेलू रसोई में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का बढ़ता उपयोग भी बिजली की मांग में इजाफा कर रहा है.
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान ऊंचा बना रहता है और पर्यटन गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं तो बिजली की मांग में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में ऊर्जा विभाग के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.