पंजाब में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ राजनीतिक दलों ने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है. नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर चुनावी तैयारियों को गति दी जा रही है. पार्टियों का जोर खासतौर पर बूथ स्तर की टीम तैयार करने पर है, क्योंकि मतदान के दिन जमीनी नेटवर्क ही सबसे अहम भूमिका निभाता है. इसी रणनीति के तहत भाजपा, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी हैं.
आम आदमी पार्टी ने हाल में 14 ब्लॉक अध्यक्ष और यूथ विंग के 493 ब्लॉक समन्वयक नियुक्त किए. शिरोमणि अकाली दल ने अलग-अलग प्रकोष्ठों और संगठनात्मक पदों पर 188 कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी है. इनमें हलका अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, यूथ विंग और लोकसभा हलका प्रभारी जैसे पद शामिल हैं. दोनों दल लगातार अपने जमीनी नेटवर्क को विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं.
पंजाब भाजपा भी संगठन विस्तार में तेजी दिखा रही है. नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के बाद विभिन्न मोर्चों में 94 संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं. पार्टी को राज्य के 25,332 बूथों पर कमेटियां सक्रिय करनी हैं. प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यों की टीम बनाने का लक्ष्य है. अभी 11 हजार से ज्यादा बूथों पर ऐसी टीमें तैयार नहीं हुई हैं.
भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे के लिए 6,425 सब-सर्किल और 622 सर्किल बनाने की योजना तैयार की है. 117 विधानसभा क्षेत्रों में पांच-पांच सर्किल होंगे और एक सर्किल में लगभग 40 बूथ रखे जाएंगे. पार्टी का लक्ष्य 30 सितंबर तक संगठनात्मक ढांचा तैयार करना और 31 अक्टूबर तक बूथ कमेटियों को सक्रिय करना है. हर बूथ के लिए करीब 250 सदस्यों वाला व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की भी योजना है.
कांग्रेस ने संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत काम शुरू किया है. पार्टी ने हाल में पांच नियुक्तियां की हैं और पहली बार पंजाब में बूथ स्तर पर 11 सदस्यीय कमेटियां बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इस बीच भाजपा के बीएल संतोष और श्रीनिवासलु मंथरी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं. अकाली दल में सुखबीर सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा, जबकि कांग्रेस और आप के वरिष्ठ नेता भी संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं.