भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है. इस अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो और अपात्र अथवा त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को चिन्हित किया जा सके.
अमृतसर के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त दलविंदरजीत सिंह ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप जिले में प्री-एसआईआर के तहत मतदाताओं की मैपिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, अद्यतन और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अमृतसर जिले में कुल 19 लाख 73 हजार 71 पंजीकृत मतदाता हैं. इनमें से 17 लाख 51 हजार 918 मतदाताओं की वर्ष 2003 की मतदाता सूची के साथ सफलतापूर्वक मैपिंग की जा चुकी है. यह जिले के कुल मतदाताओं का 88.79 प्रतिशत हिस्सा है. अधिकारियों का कहना है कि शेष मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूट न जाए. प्रशासन इस कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए विभिन्न स्तरों पर निगरानी कर रहा है.
दलविंदरजीत सिंह ने बताया कि अभी 2 लाख 21 हजार 153 मतदाता ऐसे हैं जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है. इन मतदाताओं तक पहुंचने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है. इसके तहत 25 जून 2026 से 24 जुलाई 2026 तक सभी बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे. इस दौरान मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि करने के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी.
इसी अवधि में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी पूरा किया जाएगा ताकि मतदान प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया जा सके. निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 3 अगस्त 2026 को किया जाएगा. इसके बाद 3 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक नागरिकों से दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी. प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा. सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी.