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लखनऊ में बदल गए ड्राइविंग लाइसेंस के नियम, डीएल रिन्यू कराने के लिए देना होगा हाईटेक टेस्ट

लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित होने जा रही है. नए ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में सेंसर और कैमरों की निगरानी में टेस्ट होगा. जानें क्या है पूरा प्रक्रिया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
लखनऊ में बदल गए ड्राइविंग लाइसेंस के नियम, डीएल रिन्यू कराने के लिए देना होगा हाईटेक टेस्ट
Courtesy: Pinterest

लखनऊ: लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राज्य सड़क परिवहन प्राधिकरण ने राजधानी में ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (एडीटीसी) के संचालन को मंजूरी दे दी है. इसी महीने के अंत तक यह केंद्र शुरू होने की संभावना है, जहां सेंसर और कैमरों की निगरानी में आवेदकों का ड्राइविंग टेस्ट लिया जाएगा.

नए नियमों के अनुसार, जिन लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है और निर्धारित समय पर उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया है, उन्हें दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है. मोटर वाहन अधिनियम के तहत लाइसेंस समाप्त होने की तारीख से एक वर्ष तक नवीनीकरण के लिए टेस्ट की जरूरत नहीं होती, लेकिन एक साल से अधिक देरी होने पर टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा.

क्या है पूरी प्रक्रिया?

अब परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक कराने वाले आवेदकों को पहले ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर आवेदन पत्र की जांच और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद उन्हें उदेतखेड़ा मौंदा स्थित नए ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में ड्राइविंग टेस्ट देना होगा.

यह केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से करीब 20 किलोमीटर दूर कानपुर रोड किसान पथ के पास बनाया गया है. यहां केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक तैयार किया गया है.

ड्राइविंग लाइसेंस कब तक रहेगा वैध?

लर्निंग लाइसेंस धारकों को भी अब परमानेंट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से ड्राइविंग टेस्ट देना होगा. पहली बार जारी होने वाला ड्राइविंग लाइसेंस 40 वर्ष की आयु तक वैध रहेगा. उदाहरण के तौर पर यदि किसी आवेदक की उम्र 25 वर्ष है तो उसे 15 वर्ष के लिए लाइसेंस मिलेगा, जबकि 30 वर्ष की आयु पर 10 वर्ष की वैधता मिलेगी. इसके बाद हर पांच वर्ष पर नवीनीकरण कराना होगा.

कार, ट्रक या अन्य चार पहिया वाहन के लाइसेंस के लिए आवेदकों को पहले पांच मिनट का सिम्युलेटर प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके बाद उन्हें ऑटोमेटिक ट्रैक पर टेस्ट देना होगा. दोपहिया, चार पहिया और ट्रक के लिए अलग-अलग ट्रैक बनाए गए हैं.

कैसे की जाएगी निगरानी?

कार चालकों को पैरलल पार्किंग, चढ़ाई और रिवर्स ड्राइविंग जैसी चुनौतियां निर्धारित समय में पूरी करनी होंगी. पूरे ट्रैक पर सेंसर और कैमरे लगे होंगे. किसी भी गलती पर सेंसर बीप करेगा और कैमरे में रिकॉर्डिंग हो जाएगी. आवेदकों को लगभग 3 से 4 मिनट के भीतर पूरा ट्रैक पार करना होगा. निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने वालों का लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा.