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3 अगस्त से पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र, बेअदबी कानून में बड़े बदलाव की तैयारी; CM मान का बड़ा ऐलान

पंजाब सरकार ने 3 से 10 अगस्त तक विधानसभा का मानसून सत्र बुलाने का फैसला किया है. इस दौरान बेअदबी कानून में संशोधन, निजी स्कूल फीस अध्यादेश और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी.

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Edited By: Babli Rautela
3 अगस्त से पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र, बेअदबी कानून में बड़े बदलाव की तैयारी; CM मान का बड़ा ऐलान
Courtesy: AI

पंजाब सरकार ने आगामी विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 3 अगस्त से 10 अगस्त तक मानसून सत्र बुलाने को मंजूरी दे दी गई. सरकार ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर सत्र की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि इस सत्र में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026 में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा निजी स्कूलों की फीस से जुड़े अध्यादेश को भी विधानसभा में पेश किया जाएगा.

बेअदबी कानून में संशोधन की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने बेअदबी कानून में संशोधन को लेकर एडवोकेट जनरल से कानूनी राय मांगी है. कानूनी राय मिलने के बाद संशोधन प्रस्ताव विधानसभा में चर्चा के लिए लाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सुझावों को भी गंभीरता से शामिल कर रही है, ताकि कानून धार्मिक भावनाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो.

श्री अकाल तख्त ने दिए थे कई सुझाव

29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब ने सभी सिख विधायकों को तलब कर कानून में कई बदलाव सुझाए थे. सरकार को करीब 10 महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें कुछ प्रमुख सुझावों पर सरकार सहमत नजर आ रही है. इनमें सबसे अहम सुझाव 'कस्टोडियन' शब्द हटाने का है. सरकार अब इस शब्द की जगह नया कानूनी शब्द जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिसकी स्पष्ट व्याख्या भी कानून में शामिल होगी.

'बीड़' शब्द फिर से शामिल करने की तैयारी

मौजूदा कानून में 'बीड़' शब्द की जगह 'स्वरूप' शब्द इस्तेमाल किया गया था. इस पर श्री अकाल तख्त ने आपत्ति जताते हुए कहा कि 'बीड़' शब्द सिख परंपरा का हिस्सा है और इसे हटाना उचित नहीं है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि संशोधन में 'बीड़' और 'बीड़ां' शब्दों को दोबारा शामिल किया जा सकता है.

कानून में प्रत्येक गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप के लिए केंद्रीय रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड और विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID) का प्रावधान रखा गया था. श्री अकाल तख्त ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस पूरे प्रावधान को हटाया जा सकता है.