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फरीदकोट में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़, 35 से अधिक युवक सुरक्षित

जिले में अवैध रूप से चल रहे नशा छुड़ाऊ केंद्रों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है. इसके बावजूद ऐसे केंद्र पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहे. ताजा मामले में एक गुप्त शिकायत फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर के पास पहुंची. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीसी ने स्वास्थ्य विभाग और सिविल प्रशासन के अधिकारियों को तुरंत जांच और कार्रवाई के आदेश दिए.

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Edited By: Antima Pal
फरीदकोट में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़, 35 से अधिक युवक सुरक्षित
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फरीदकोट: फरीदकोट में एक और अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्र का खुलासा हुआ है. प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सिक्खांवाला रोड स्थित दो कोठियों से 35 से अधिक युवकों को निकालकर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया है.

अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़

जिले में अवैध रूप से चल रहे नशा छुड़ाऊ केंद्रों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है. इसके बावजूद ऐसे केंद्र पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहे. ताजा मामले में एक गुप्त शिकायत फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर के पास पहुंची. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीसी ने स्वास्थ्य विभाग और सिविल प्रशासन के अधिकारियों को तुरंत जांच और कार्रवाई के आदेश दिए.

35 से अधिक युवक सुरक्षित

आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मदद से छापेमारी की. टीम में डॉक्टर हरिंदर गांधी, नायब तहसीलदार हर्षवीर गोयल सहित अन्य अधिकारी शामिल थे. टीम जब सिक्खांवाला रोड पर पहुंची तो केंद्र के संचालक को भनक लग गई और वह मौके से भाग निकला.

दोनों कोठियों के अंदर टीम को 35 युवक मिले. इन्हें नशा छुड़ाने के नाम पर रखा गया था. प्रारंभिक जांच में पाया गया कि केंद्र के पास आवश्यक वैध अनुमति नहीं थी. मेडिकल स्टाफ और नियमों का भी पालन नहीं हो रहा था. युवकों को तुरंत सुरक्षित निकालकर सरकारी केंद्र में भर्ती कराया गया है ताकि उन्हें सही इलाज मिल सके.

इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि बार-बार छापेमारी के बावजूद ऐसे केंद्र कैसे चलते रहते हैं और संचालकों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है. प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन पूरी तरह रोकथाम के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है.

नशा मुक्ति एक गंभीर विषय है. सही मेडिकल सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ के बिना ऐसे केंद्र युवकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं. इसलिए वैध और सरकारी केंद्रों में ही इलाज कराना सुरक्षित माना जाता है.